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आरोपी को ही बचाने में लगी थी एसिड अटैक पीड़िता

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लेडी डॉक्टर अमृत कौर को अपने दोस्त डॉक्टर अशोक यादव पर अटूट विश्वास था। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हमले के बाद पहली कॉल पीड़िता ने अशोक को ही की थी। इतना ही नहीं उसने पुलिस से कहा यदि अशोक से पूछताछ की गई तो वह केस वापस ले लेगी।
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कॉल करने के चंद मिनटों में ही आरोपी घटना स्थल पर पहुंच गया। वही उसे अस्पताल ले गया। पुलिस की गिरफ्त में आने से पूर्व वह पीड़िता के परिवार के साथ ही मौजूद रहा। ऐसे में किसी को उस पर शक भी नहीं हुआ। लेकिन जरूरत से ज्यादा सहानुभूति दिखाने की वजह से पुलिस को उस पर शक हो गया।

जांच अधिकारी ने बताया कि शक होने पर पुलिस ने पीड़िता को बताया कि वह अशोक से पूछताछ करने जा रही है तो इस बात का पीड़िता ने कड़ा विरोध किया। उसने कहा कि अशोक कभी ऐसा नहीं कर सकता।
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पीड़िता ने यहां तक धमकी दी कि अगर पुलिस अशोक से पूछताछ करेगी तो वह अपना केस वापस ले लेगी। पीड़िता के ऐतराज के बाद पुलिस ने उसे विश्वास में लेकर अशोक से पूछताछ की। वारदात का खुलासा होने के बाद पुलिस ने पीड़िता को जब हकीकत बताई तो उसे यकीन नहीं हुआ।
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दस साल का रिश्ता था दोनों का

लेडी डॉक्टर पर तेजाब डलवाने वाला डॉक्टर पिछले 10 साल से पीड़िता को जानता था। दोनों की मुलाकात रूस में हुई थी। अमृत बेलारूस के कॉलेज से एमबीबीएस कर रही थी। जबकि अशोक वहीं के एक दूसरे कॉलेज से एमबीबीएस कर रहा था।

एमबीबीएस करने के बाद दोनों ने एक साथ एमडी भी किया और दोनों भारत आ गए। पिछले करीब तीन साल से दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। यहां तक दोनों एक ही अस्पताल (ईएसआई) में नौकरी भी करने लगे।

अशोक मायापुरी में रहने लगा, जबकि अमृत हरी नगर में रहती थी। अशोक उससे शादी करना चाहता था, लेकिन युवती ने शादी से साफ इनकार कर सिर्फ दोस्ती तक रिश्ता रखने के लिए कहती थी। अशोक ने बदला लेने के लिए साजिश रच कर उस पर तेजाब डलवा दिया।
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