गुड़गांव की फाइनेंस कंपनी में काम करने वाली युवती के साथ दुष्कर्म मामले में सोमवार को नया खुलासा हुआ है। दुष्कर्म से पहले आरोपी शिवकुमार यादव ने युवती की बेरहमी से पिटाई की थी। उसने युवती को मारने का प्रयास भी किया था। इस पिटाई से युवती बहुत ज्यादा डर गई थी। दुष्कर्म करने के बाद आरोपी के मन में कोई खौफ नहीं आया था और वह युवती को उसके घर तक छोड़ने गया था।
उत्तरी जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवती के विरोध करने पर आरोपी ने उस पर लगातार मुक्के व थप्पड़ मारे थे। इससे युवती का होठ फट गया था। मेडिकल जांच में आया है कि युवती के चेहरे पर नील पड़ी हुई हैं और चेहरे पर गुम चोटें हैं। इसके बाद आरोपी ने युवती की गर्दन दबाकर मारने का प्रयास किया था। हालांकि वह पूछताछ में मारने की बात से इनकार कर रहा है।
उसका कहना था कि उसने डराने के लिए ऐसा किया था। उसने ये भी कहा था कि उसके पास लोहे का सरिया है और वह उसके शरीर में डाल देगा। इससे युवती बहुत ज्यादा डर गई थी और कंपकंपाने लग गई थी। आरोपी ने युवती के साथ इंद्रलोक-केशवपुरम रोड पर छप्पनबीगा पार्क के पास सुनसान जगह पर स्थित कूड़ेदान के करीब युवती से कैब में दुष्कर्म किया था।
ये जगह युवती के घर से करीब ढाई से तीन किलोमीटर दूर है। दुष्कर्म के बाद वह युवती को उसके घर तक छोड़ने गया था। युवती का घर मेन रोड पर ही है। गाड़ी से उतरते समय उसने युवती को फिर जान से मारने की धमकी दी थी। जब आरोपी युवती को छोड़कर जाने लगा तभी युवती ने उसकी गाड़ी की एक फोटो खींच ली थी। फोटो में गाड़ी कार रजिस्ट्रेशन नंबर आ गया था। जिसके आधार पर आरोपी युवती तक पहुंच गया था।
इससे पहले भी आरोपी ने किया था दुष्कर्म
महरौली में डांसर बार युवती से दुष्कर्म के मामले में आरोपी 100 नंबर पर हुई कॉल की वजह से बरी हो गया था। पीड़ित 22 वर्षीय युवती ने 100 नंबर पर चेन छीनने की कॉल की थी। उसने कॉल में दुष्कर्म होने की बात का खुलासा नहीं किया था। माना जा रहा है कि इसकी कॉल के चलते आरोपी को संदेह का लाभ मिला और वह बरी हो गया था। फिलहाल पुलिस अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि पुलिस ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है या नहीं। माना जा रहा है कि पुलिस आरोपी के बरी होने के खिलाफ अपील कर सकती है।
गौरतलब है कि इंद्रलोक में युवती के साथ दुष्कर्म के आरोपी शिव कुमार यादव के खिलाफ महरौली थाने में भी दुष्कर्म का मामला दर्ज है। आरोपी ने वर्ष 2011 में इसी तरीके से बार डांसर युवती से कैब में दुष्कर्म किया था। दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार महरौली मामले में युवती ने गुड़गांव से कैब ली थी। आरोपी ने रास्ते में चाकू दिखाकर युवती के साथ दुष्कर्म किया था। उसने युवती के साथ मारपीट भी की थी। आरोपी जब युवती को मौके पर छोड़कर फरार हो गया था तो युवती ने 100 नंबर पर कॉल की थी कि उसकी चेन छीन ली। पुलिस जब मौके पर पहुंची थी तो युवती ने दुष्कर्म होने का खुलासा किया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब युवती से पूछा गया कि उसने झपटमारी की कॉल क्यों की थी तो पीड़ित युवती ने बताया कि शर्म के चलते उसने 100 नंबर पर पुलिस को दुष्कर्म के बारे में बताया था। युवती का कहना था कि कॉल होने पर पुलिस मौके पर तो आएगी तब वह पूरा खुलासा कर देगी। मगर ये कॉल की आरोपी के बरी होने की वजह बन गई।
‘फर्जी’ कैरेक्टर सर्टिफिकेट से मिली थी क्लीन चिट
रेप के आरोपी ड्राइवर शिव प्रसाद यादव ने कंपनी में अपनी कैब चलवाने के लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनवाया था। हालांकि करेक्टर सर्टिफिकेट के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने इसे फर्जी बताया है। उनका कहना है कि आरोपी के कैरेक्टर सर्टिफिकेट पर जिस अधिकारी के हस्ताक्षर दर्शाए हैं, वह उस दौरान उस थाने में तैनात नहीं थे।
आरोपी के कैरेक्टर सर्टिफिकेट ने दिल्ली पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया। आरोपी शिव प्रसाद यादव के खिलाफ 2011 में एक बार डांसर ने महरौली थाने में रेप की शिकायत दर्ज करवाई थी।
इसके बाद सात माह जेल में रहने के बाद साक्ष्यों के अभाव में उसे बरी कर दिया गया। ऐसे में दिल्ली पुलिस की ओर से कैरेक्टर सर्टिफिकेट कैसे बनाया गया। वर्ष 2014 के मई में आरोपी को करेक्टर सर्टिफिकेट में उसके खिलाफ कोई भी मामला नहीं होने का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस खुद कटघरे में खड़ी हो गई है। पुलिस ने इस चूक को गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश दिए हैं।
जखीरा पुल के पास दिया वारदात को अंजाम
दिल्ली पुलिस ने इंद्रलोक रेप मामले के घटनास्थल की पहचान कर ली है। युवती के साथ जखीरापुल के पास स्थित गंदा नाला के पास दुष्कर्म किया गया था। घटनास्थल तीन थानों के बीच है और यहां पुलिस के चार पिकेट हैं। ऐसे में वारदात होने से पुलिस पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
आरोपी ने बताया कि उसने पीड़िता को वसंत विहार के एशियन टावर के पास अपनी कैब में बिठाया था। उसके बाद उसे लेकर वह इंद्रलोक की ओर चला। वसंत विहार से वह आरकेपुरम, मोती बाग, पालम होते हुए दिल्ली कैंट पहुंचा। जहां से वह नारायणा, मायापुरी, राजौरी गार्डन, टैगोर गार्डन होते हुए मोती नगर, पंजाबी बाग, त्रिनगर से दयाबस्ती होते हुए जखीरापुल के नाले के पास पहुंचा।
उस दौरान पीड़िता कैब में गहरी नींद में सो रही थी, जिसका फायदा उठाकर उसने नाले के पास सुनसान जगह पर कैब खड़ी कर दी और पिछली सीट पर जाकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। हालांकि उस सड़क पर रात में वाहनों की चहल-कदमी रहती है।
आरोपी ने जिस जगह पर वारदात को अंजाम दिया उस जगह से तीन थानों केशवपुरम, भारत नगर और सराय रोहिल्ला की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। बताया जा रहा है कि रात में इस इलाके में गश्त नहीं के बराबर होती है और आरोपी ने इस बात का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दिया।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है पुलिस
पुलिस पूरे रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाल रही है। इसे सबूत के तौर पर अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मथुरा जाने वाले रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की भी जांच की जाएगी।
उबर के अधिकारी से पूछताछ, दिल्ली में कंपनी बैन
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को उबर कंपनी के दिल्ली एनसीआर चीफ गगन भाटिया से पूछताछ कर कंपनी के ऑपरेट करने के तरीकों के बारे में जानकारी हासिल की। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कंपनी का संचालन अमेरिका से होता है और सर्वर के मार्फत पूरा सिस्टम जुड़ा हुआ है। कंपनी भारत के महानगरों में कैब मालिकों से अनुबंध करती है और उन्हें अपने इलाके में सवारी मुहैया करवाने का आश्वासन देती है।
ड्राइवर और कैब मालिक कंपनी से जुड़े रहें इसके लिए कंपनी उन्हें एक फोन देती है। जिसमें जीपीएस होता है और जो कंपनी के एप के जरिए जुड़े होते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, भाटिया से पूछताछ से पुलिस संतुष्ट नहीं है। कंपनी अधिकारी यह बताने में असमर्थ हैं कि कंपनी कब बनी और अब तक किस तरह से काम कर रही है। इनके पास कंपनी का कोई कागजी दस्तावेज नहीं है। इससे लापरवाही सामने आ रही है। अब पुलिस कंपनी को लीगल नोटिस भेजने का मन बना रही है, जिससे उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।
दिल्ली में उबर बैन
परिवहन विभाग ने उबर को दिल्ली में ब्लैक लिस्ट कर दिया है। विभाग ने आरोपी ड्राइवर का लाइसेंस रद्द करने के साथ वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन का परमिट व रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया है। विभाग के विशेष आयुक्त कुलदीप सिंह गांगर ने बताया कि दिल्ली लोकल के लिए कैब बुक करने की सुविधा देने के लिए कंपनी को रेडियो टैक्सी स्कीम के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वर्तमान में छह कंपनियां है जो इस स्कीम के तहत दिल्ली में काम कर रही हैं। उनकी कुल 5071 रेडियो टैक्सी चल रही हैं। मगर उबर बिना रेडियो टैक्सी स्कीम के रजिस्ट्रेशन कराए ही ऐसा कर रही थी।
पुलिस ने दिया था चरित्र प्रमाण पत्र
आरोपी चालक का लाइसेंस पुलिस द्वारा चरित्र प्रमाणपत्र देने होने के बाद बनाया गया था। परिवहन विभाग ने कहा कि कमर्शियल लाइसेंस के लिए चालक के पास या तो पासपोर्ट हो, पीएसवी बैज हो या फिर पुलिस से जारी कैरेक्टर सर्टिफिकेट। पुलिस ने उसे मई 2014 में सर्टिफिकेट जारी किया था।
रेप मामले में भाजपा को घेरने कोशिश
कांग्रेस प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा है कि भाजपा का नारा अब महिला सुरक्षा नहीं बल्कि ‘बहुत हुए बलात्कार - अबकी बार मोदी सरकार’ हो गया है। बलात्कार जैसी घटनाएं नहीं रुक रही हैं तो दूसरी तरफ विवादास्पद मंत्री साध्वी ज्योति निरंजन संवेदनशील जगह सभा रखकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह की चुप्पी भाजपा की मूकदर्शक मंशा दर्शा रही है।
वहीं आम आदमी पार्टी के नेता योगेन्द्र यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने अपराधियों पर अंकुश लगाने में तेजी नहीं दिखाई, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे पार्टी के लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उन्हें दिन भर पानी तक नहीं दिया। दुष्कर्म के आरोपी को मई में पुलिस ने चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया था, जबकि पुलिस को कैब चलाने वाली कंपनी के ऑफिस तक का अता-पता नहीं है।
मामले में भाजपा आई बचाव की मुद्रा में
कैब में युवती से दुष्कर्म मामले को लेकर प्रदेश भाजपा बचाव की मुद्रा में आ गई है। करीब दो वर्ष पहले चलती बस में युवती से गैंगरेप के मामले में सड़कों पर उतरकर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली भाजपा ने अब ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्थायी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही है। प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने उपराज्यपाल से इस संबंध में अनुरोध किया है।
उपाध्याय ने कहा कि शुक्रवार रात दिल्ली में टैक्सी चालक द्वारा किए गए दुराचार मामले के लिए तुरंत फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित की जाए, जहां छह माह के भीतर केस पर फैसला हो सके। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अक्सर दुष्कर्म की शिकार महिलाओं के प्रारंभिक मेडिकल टेस्ट में कोताही बरती जाती है, जिसके चलते साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं। इसलिए राजधानी में चार अस्पताल चिह्नित किए जाएं, जहां दुष्कर्म की शिकार महिलाओं की मेडिकल जांच हो सके। साथ ही जांच के लिए वहां महिला डॉक्टरों का पैनल हो।