जेएनयू के एमफिल छात्र मुथू कृष्णन के आत्महत्या के बाद शिक्षकों का एक तबका सवाल उठाने लगा है। शिक्षकों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में दलित छात्रों के साथ भेदभाव व उत्पीडन होता है।
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अक्सर ऐसे हालत पैदा कर दिए जाते हैं कि या तो दलित स्वयं ही विश्वविद्यालय छोड़ देता है
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- फोटो : अमर उजाला
जामिया की प्रोफेसर हेमलता महेश्वर ने तो यहां तक बता दिया है कि वह मुथू बीते हफ्ते से भूखा था और उनके पास खाने को नहीं था। उनके दोस्तों ने उन्हें डोसे खिलाए थे। यह जानकारी उन्हें कृष्णन के दोस्तों से मिली है।
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- फोटो : rajini krish
मुथू कृष्णन की आत्महत्या के बाद से राजनीति गरमा गई है। शैक्षणिक संस्थानों में दलित छात्रों के साथ हो रहे उत्पीडन को लेकर बुधवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई।
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- फोटो : फेसबुक से
प्रेस कांफ्रेंस में हिंदू कॉलेज केशिक्षक रतनलाल ने अपने साथ हुए अनुभव को बताते हुए कहा कि सवाल उठाने पर दलित के साथ उत्पीडन होता है। अक्सर ऐसे हालत पैदा कर दिए जाते हैं कि या तो दलित स्वयं ही विश्वविद्यालय छोड़ देता है या फिर आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
मूथू भी ऐसी ही साजिश का शिकार हुआ है। डीयू के अरविंदो कॉलेज के प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि हैदराबाद के छात्र रोहित वेमुला के बाद मूथु की आत्महत्या एक सांस्थानिक हत्या है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
कहा कि हमारी मांग है कि देश की सभी विश्वविद्यालयों में थोराट कमेटी के सुझावों को लागू किया जाए, शिकायत निवारण समिति का गठन हो, जिससे कि भेदभाव को रोका जा सके।
उन्होंने जेएनयू शोधार्थी की आत्महत्या की जांच कराने की भी मांग की। वहीं जेएनयू केशोधार्थी बाल गंगाधर बागी ने मुथू कृष्णन की मानसिक हालात केबारे में बताया कि कैसे वह गरीबी में रहने केलिए अभिशप्त था।