नहीं होगी ट्रेनों की टक्कर
इस नई तकनीक से एक ही ट्रैक पर चल रही ट्रेनें नजदीक आने पर अपने-आप रुक जाएंगी। अभी दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा गलियारे में करीब 3000 किलोमीटर पर कवच से संबंधित उपकरण लगाए जा रहे हैं। इसमें रेलवे ने अभी तक 4,275 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई है। 364 दूरसंचार टावर लगाए गए हैं। करीब 285 स्टेशन को इससे लैस किया गया है। देशभर के 319 रेल इंजनों को इससे लैस किया गया है। दक्षिणी मध्य रेलवे ने 1465 किलोमीटर मार्ग को इस सिस्टम से लैस किया है।
रेलवे कवच 4.0 पर कर रहा काम
रेल हादसों से बचने और कम समय में लंबी दूरी तय करने के लिए रेलवे ‘कवच 4.0’ प्रणाली पर काम कर रहा है। दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता के बीच 3,000 किमी पर इस उपकरण को लैस किया जाना है। सबसे पहले दिल्ली रेल मंडल ने इंजन पर कवच लगाने का काम शुरू किया था। साथ में ट्रैक और रेलवे स्टेशनों पर इसे लगाया जाना है। इसमें दिल्ली-रेवाड़ी रूट का काम भी इस साल पूरा कर लिया जाएगा। नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इसे लगाने की प्रक्रिया चल रही है। तीनों जगहों पर इंस्टॉल होने के बाद कवच प्रणाली काम करना प्रारंभ कर देगी।
इस तरह होगा खर्च
उपकरण लगाने पर करीब 50 लाख रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च होगा। वहीं, एक इंजन पर इसे लगाने की कीमत करीब 70 लाख रुपये है। अभी तक रेलवे 1,216.77 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। 2024-25 के दौरान 1,112.57 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।