आम आदमी पार्टी (आप) का समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों पर मानना है कि यह दो लोगों की पसंदगी-नापसंदगी से जुड़ा विषय है। बेहद निजी संबंधों पर राज्य को किसी तरह की पाबंदी नहीं लगानी चाहिए। सूत्रों की मानें तो पार्टी इस मुद्दे को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कर रही है।
इसमें समलैंगिक संबंधों की वकालत करता हुआ अलग से एक चैप्टर जोड़ा गया है। पार्टी अगर सत्ता में आती है तो इस बारे में कानून बनाएगी।
पार्टी का तर्क है कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए यौन संबंध पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
मामला निजी आजादी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का है। इस पर किसी तरह की पाबंदी बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस बारे में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सही था। अदालत ने समझदारी से बेहद पुराने, दमनकारी और अन्यायपूर्ण कानून को खत्म किया था।
वहीं, दलित मुसलमानों को ‘आप’ अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करेगी।
समलैंगिक को सुप्रीम कोर्ट ने बताया है अवैध
मालूम हो कि जुलाई 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिक संबंधों पर अपने फैसले में कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा-377 का वह प्रावधान मानवाधिकारों का उल्लंघन है, जिसमें समलैंगिकों के बीच सेक्स को अपराध माना गया है।
धार्मिक संगठनों ने इसकी मुखालफत करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए दिसंबर 2013 में सुप्रीम अदालत ने हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए समलैंगिक संबंधों को गैर-कानूनी करार दिया था।
बाद में केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
एससी श्रेणी में शामिल करेंगे दलित मुसलिम
पार्टी आरक्षण नीति में बदलाव की पक्षधर है। घोषणा पत्र में दलित मुसलमानों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करने का वादा किया है।
पार्टी का मानना है कि इससे अभावों के बीच गुजारा कर रहे इस समुदाय के बड़े तबके के हालात में सुधार होगा।
वहीं, पार्टी मदरसा बोर्ड की डिग्री को कॉलेज में दाखिले के लिए मान्यता दिलाएगी। साथ ही वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर से सियासी-नौकरशाही दखल को खत्म करके इसे समुदाय के कल्याण में इस्तेमाल को सुनिश्चित करेगी।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि ‘आप’ का घोषणापत्र तकरीबन तैयार है। इसी महीने के आखिर तक इसे जारी कर दिया जाएगा।
इसमें विदेश नीति, आंतरिक व वाह्य सुरक्षा, नक्सलवाद, आतंकवाद, आर्थिक-सामाजिक नीति जैसे देश की आवाम पर असर डालने वाले सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा है।