भाजपा नेता पर आम आदमी के स्टिंग 'ऑपरेशन पर्दाफाश' ने पूरे देश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप के जिस नेता ने इस पूरे स्टिंग को अंजाम दिया उन्हें इस खुफिया ऑपरेशन की ट्रेनिंग कहां से मिली।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक संगम विहार से आप के विधायक दिनेश मोहनिया ने बीजेपी के नेता शेर सिंह डागर पर जिस स्टिंग को शूट किया उसकी ट्रेनिंग उन्हें पहले ही दी गई थी।
स्टिंग पर भेजने से पहले आप विधायक मोहनिया को बाकायदा इस बात की ट्रेनिंग दी गई थी कि उन्हें बातचीत को कैसे रिकॉर्ड करना है। साथ ही उन्हें सिखाया गया था कि मोबाईल एप्लीकेशन का इस्तेमाल कहां और कब करना है।
चूंकि इस पूरे मामले को कैमरे में शूट करना था इसलिए मोहनिया को न सिर्फ एक खुफिया कैमरा दिया गया बल्कि उसे कैसे इस्तेमाल किया जाता है इसकी भी ट्रेनिंग दी गई थी।
मोहनिया को मिला था एक खुफिया कैमरा
हालांकि, आजकल पेन, कैमरे, बटन और चाबी के रुप में दिखने वाले खुफिया कैमरे आसानी से बाजार में उपलब्ध हैं। ऐसे कैमरे दिल्ली के पालिका ब़ाजार और नेहरू प्लेस में भी आसानी से खरीदे जा सकते हैं।
इस प्रकार के आधुनिक यंत्र न सिर्फ कम आवाज और कम रोशनी में भी काम करते हैं बल्कि थोड़ी सी ट्रेनिंग के बाद इन्हें आसानी से चलाया भी जा सकता है।
आम आदमी पार्टी के सूत्र के मुताबिक दिनेश मोहनिया को की-चेन की आकार वाला खुफिया कैमरा दिया गया था। इस स्टिंग में आप विधायक दिनेश मोहनिया के साथ आप के ही एक कार्यकर्ता विवेक यादव को भी उनके साथ भेजा गया था।
स्टिंग आइडिया के बारे में आप का कहना है कि बीजेपी की तरफ से आप नेताओं को पैसे और मंत्री पद का लालच देकर बरगलाने की खबरों के बाद आम आदमी पार्टी ने स्टिंग ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
मोहनिया नहीं थे इस आइडिया के समर्थक
इससे पहले शालीमार बाग से आप विधायक वंदना कुमारी को भी पार्टी छोड़ने के लिए लालच दिया जा रहा था। यह पूरा मामला भी सीसीटीवी कैमरे में कैद तो हुआ लेकिन आवाज न होने की वजह से इसकी प्रामाणिकता साबित करना मुश्किल था। इसके बाद ही पार्टी के बड़े नेताओं ने स्टिंग करने की योजना तैयार की।
इसके बाद आम आदमी पार्टी ने फैसला किया कि पार्टी के अंदर ही ऐसे सेल का गठन किया जाए जो विधायकों को स्टिंग करने की प्रक्रिया के बारे में बता सके।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं ने स्टिंग के इस आइडिया को सही नहीं माना। डागर स्टिंग को अंजाम देने वाले दिनेश मोहनिया भी इस आइडिया के पक्ष में नहीं थे। हालांकि बाद में उन्हें इस स्टिंग का महत्व समझ में आया।