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15 साल में बिजली के दाम कम नहीं कर पाई, अब कैसे करेगी?

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दिल्ली विस चुनाव में कांग्रेस ने सबसे पहले वादों का मास्टर स्ट्रोक (घोषणा पत्र) मार दिया है। अक्सर झूठे वादों की मार की बात करने वाली कांग्रेस ने दिल्ली में रह रहे अखिलेश कुमार है।
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वोट बैंक के हिसाब से उत्तराखंड समुदाय के लिए दिल्ली में उत्तरायणी मेला लगाने में आर्थिक सहायता का वादा किया है। हालांकि दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए कुछ खास नहीं दिखा। घोषणा पत्र को देखकर कुछ सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब जरूरी है।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में कई ऐसे वादे शामिल हैं, जिससे 15 साल के शासनकाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंद्रह साल तक लगातार बिजली की दरें बढ़ती रहीं और सब्सिडी दी गई।
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जिस ‌बिल को बढ़ाया उसे कैसे करेंगे कम?

अब सवाल उठ रहा है कि यह कैसे विश्वास करें कि डेढ़ रुपये यूनिट और पचास फीसदी डिस्काउंट देंगे। छात्र व बुजुर्गों को मेट्रो में रियायती पास की मांग कई बार उठी, उन्हीं के मुख्यमंत्री व मंत्री कह चुके हैं ऐसी व्यवस्था मेट्रो में नहीं हो सकती।

विस चुनाव 2013 में जिस तरह से बिजली-पानी पर वादे आम आदमी पार्टी ने किए थे, कांग्रेस उससे भी एक कदम आगे बढ़ी है। पानी के पुराने बिल माफ करेंगे तो सीवर कनेक्शन फ्री देंगे।

कांग्रेस के शासनकाल में लगातार शुल्क बढ़े, सीवर चार्ज 60 फीसदी हुआ, जिसे अब कैसे 30 फीसदी करेंगे। सफाई कर्मचारी या अन्य श्रेणी में सरकार में अनुबंध पर कर्मचारी रखने का सिलसिला सालों से चल रहा है, अभी तक इसमें फैसला करने में कांग्रेस कोर्ट के आदेश का हवाला देती रही है।

दिल्ली सरकार के अनुदान प्राप्त डीयू कॉलेज में 80 फीसदी सीटें आरक्षित करने में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की दिक्कतें कांग्रेस को पहले से पता हैं।
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