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पत्नी ने करवाया आप नेता को अगवा, नशा मुक्ति केंद्र में मिला

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13 दिन पहले रहस्यमय हालात में गायब हुए आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व सचिव शरद रघुवंशी को साहिबाबाद के एक नशा मुक्ति केंद्र से बरामद किया गया है। शरद का आरोप है कि पत्नी और उसके मायकेवालों ने मुझे अगवा कर नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया था।
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पत्नी शादी के बाद से ही अलग रहना चाहती थी, शुरू से ही उसकी नजर मेरी प्रॉपर्टी पर थी। वह मुझे ‘पागल’ घोषित कर मेरी प्रॉपर्टी हड़पना चाहती है।

शरद ने बताया कि ‘26 सितंबर को मैं मेरठ जाने के लिए बुटीक से निकला था। राजनगर एक्सटेंशन के पास पहुंचते ही डीयू में पढ़ रही भांजी ने कॉल कर बताया कि वह दिल्ली से मेरठ जा रही थी, पसौंडा में उसका एक्सीडेंट हो गया है।

सूचना पर भांजी को रिसीव करने पसौंडा चला गया। वहां पर भांजी के साथ साला नीरज और 3-4 लोग मौजूद थे। मुझे कार में अगवा कर मोबाइल, पर्स, एटीएम और 50 हजार रुपये लूट लिए। इसके बाद पसौंडा ले गए, वहां पर पत्नी भी थी।
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दोस्तों ने एटीएम से पैसा निकालते देखी फुटेज

पत्नी ने मायके वालों के साथ मिलकर मुझे साहिबाबाद के एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया। मेरे एटीएम कार्ड से 45 हजार रुपये निकाले।’

शरद ने पत्नी, साले, भांजी, ससुर समेत चार अज्ञात लोगों के खिलाफ कविनगर थाने में तहरीर दी है। एसएचओ का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है।

26 सितंबर को राजनगर सेक्टर-11 निवासी शरद रघुवंशी घर से सिहानी गेट स्थित अपने बुटीक शॉप पर आए थे। सुबह 11 बजे कार लेकर वहां से चले गए, इसके बाद वापस नहीं लौटे।

ऐसे हुआ खुलासा

दो दिन बाद एक अंजान व्यक्ति शरद की कार उनके घर पहुंचा गया, बताया कि शरद बिहार गए हुए हैं। शरद का मोबाइल बंद आने पर उनकी मां वीना ने कविनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी, कविनगर पुलिस तलाश कर रही थी।

घटना के बाद शरद खौफजदा हैं, परिवार और बच्चों के साथ वह राजनगर छोड़कर दिल्ली में रह रहे हैं। पहले से ही शरद की तलाश में जुटे ‘आप’ के कार्यकर्ताओं और परिजनों ने शरद के बैंक अकाउंट से पैसे निकाले जाने का पता चलने पर एटीएम की फुटेज चेक कराई।

फुटेज में शरद की भांजी और साला नीरज एटीएम से पैसे निकालते दिखे। शक होने पर शरद की पत्नी गीता से परिजनों ने पूछताछ की। गीता ने कबूला कि शरद को उसने नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया है।
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यह था मामला

शरद की मानें तो चार साल पहले नीलामी की 14 बीघे जमीन दिलाने के लिए शरद के ससुर ने उससे 18 लाख रुपये लिए थे। चार साल बाद रजिस्ट्री कराई तो जमीन का आधा मालिक शरद के साले की पत्नी को भी बना दिया।

इस वजह से शरद खफा थे, उन्होंने जमीन को अपने नाम ही कराने के लिए ससुरालियों पर दबाव दिया। ससुराल वालों से शरद की कहासुनी भी हुई थी, 28 सितंबर को दोबारा रजिस्ट्री कर पूरी जमीन उसके नाम कराने का आश्वासन ससुर ने दिया था।

शरद का दावा है कि ऐसा न करना पड़े इस वजह से उन्हें अगवा कर नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराने की प्लानिंग ससुर ने की थी।
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