फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चक्रव्यूह में बुरी फंसी AAP, कैसे निकलेगी?

विज्ञापन
विज्ञापन
दस माह पूर्व जनता के मिले भारी समर्थन से पहली बार में ही दिल्ली की सरकार बना देने वाली आम आदमी पार्टी राजनैतिक चक्रव्यूह में फंसती दिख रही है। चुनाव के बाद उसके लक्ष्मी नगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी से शुरू हुआ बगावत का सिलसिला अब उनके विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंच गया है।
विज्ञापन


ऐेसे में भाजपा ने एक खास रणनीति के तहत एनसीआर के पांच सांसदों को केंद्रीय मंत्री पद नवाज कर उनकी भी मिशन दिल्ली में जिम्मेदारी तय कर दी है। भाजपा सूत्रों की मानें तो आप को घेरने के लिए उसके तरकश में अभी कई तीर हैं जोकि चुनाव नजदीक आने के साथ दागे जाते रहेंगे।

आप की इस समय पर सबसे बड़ी चिंता पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के बगावती तेवरों को रोकना है। दिल्ली के विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में मोदी के नाम की चली आंधी से आप के बगावती नेताओं को अब मध्यावधि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी भाने लगे हैं।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार भाजपा के रणनीतिकार अपना मुख्य मुकाबला आप से ही मान रहे हैं ऐसे में बागी नेताओं के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरने की कोशिश जारी है। दिसंबर 2013 में आप की सरकार बनाने के साथ ही लक्ष्मी नगर से आप के विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने सबसे पहले बगावत का झंडा उठाया था।

इस दौरान कहा गया कि बिन्नी को मंत्री पद न मिलने पर वह बागी हुए जबकि उन्होंने इसका खंडन करते हुए कुछ ही नेताओं की पार्टी में मनमानी का आरोप लगाया। इसके बाद आरके पुरम से कम ही मार्जिन से चुनाव हारीं शाजिया इल्मी ने पार्टी पर इसी तरह का आरोप लगाया और स्वच्छ भारत अभियान के प्रदेश भाजपा के नौ रत्नों में शामिल हो गईं।

कई दिग्गज नाम कर सकते हैं भाजपा का रुख

यह सिलसिला यहां पर ही नहीं रुका, बल्कि कुछ दिन पहले रोहिणी के विधायक रहे राजेश गर्ग व तिमारपुर के विधायक रहे हरीश खन्ना ने भी बगावती तेवर दिखा दिए। अब सबसे बड़ा झटका आप के जंगपुरा से विधायक चुने गए व विधानसभा अध्यक्ष एमएस धीर के पार्टी नेताओं पर मनमानी का आरोप लगाने व मोदी की तारीफ से लगा है।

जाहिर है कि चुनाव से ठीक पहले बगावती नेताओं के जरिये चक्रव्यूह की रचना को भेदना अरविंद केजरीवाल के लिए मुश्किल होगा। पहले आप के संयोजक व पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूर्व विधायक बिन्नी व शाजिया इल्मी में उपजे भाजपा प्रेम को उनके जाने की वजह बता रहे थे लेकिन तीन अन्य विधायकों की बगावत पर उन्हें इसका जवाब तलाशना होगा, क्योंकि राजेश गर्ग व हरीश खन्ना आप के खिलाफ बगावती सुर अलापने के अलावा चुनाव न लड़ने की बात भी कह रहे हैं।

भाजपा सूत्रों के अनुसार इसके अलावा भी भाजपा ने एक सोची समझी रणनीति के तहत एनसीआर से पांच सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया। यानि दिल्ली विधानसभा चुनाव में इन सांसदों को परखा जाएगा। फरीदाबाद से कृष्ण पाल गुर्जर, गाजियाबाद से वीके सिंह, नोएडा से डॉ. महेश शर्मा, गुड़गांव से राव इंद्रजीत सिंह व दिल्ली से डॉ. हर्षवर्धन के रूप में राजधानी के जातिगत आधार व राजधानी की सीमाओं के क्षेत्र में इन नेताओं के प्रभाव का इस्तेमाल दिल्ली चुनाव में होगा।

कांग्रेस अब भी सोई हुई है?

चुनाव आयोग ने अभी दिल्ली विधानसभा की तिथियों की घोषणा तक नहीं की है लेकिन कांग्रेस अभी से ही इलेक्शन मोड में आ गई है। कांग्रेस ने साफ किया है कि घोषणापत्र में जो कहेंगे, उसे पूरा करेंगे। जो भी वादा करेंगे, उसे पूरा करने का तरीका भी साथ में देंगे। आम आदमी पार्टी और भाजपा की तरह झूठे वादे नहीं करेंगे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने दक्षिण दिल्ली केप्रमुख नेताओं की बैठक में कहा है कि हम घोषणापत्र को गीता, कुरान या बाइबल मानते हैं। इसलिए बिजली, पानी, अनधिकृत कॉलोनी, गांव, अनुबंधित कर्मचारियों के नियमन के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में जाएंगे। इन मुद्दों को कैसे अमल में लाना है, इस बात का जिक्र भी घोषणापत्र में होगा।

इसके लिए पार्टी कुछ रिटायर आईएएस और विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। इसमें सबसे बड़ा बिजली बिल कम करने का मामला है। आप और भाजपा ने जो कहा, वह पूरा नहीं कर सके। प्रदेश अध्यक्ष ने अरविंदर सिंह ने कहा है कि इस समय कांग्रेस के शासनकाल से 22 फीसदी बिल ज्यादा आ रहा है। अनुबंधित कर्मचारी नियमित नहीं किए गए।

उन्होंने आप और भाजपा नेताओं पर टोपी और निक्कर कहकर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों महिलाओं की सुरक्षा की बात करते थे, अब पुलिस तक सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि आप नेता विचारधारा के नाम पर जीते थे, अब पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं। कांग्रेस सिर्फ एक चुनाव नहीं देख रही है, अगले 30 साल की लीडरशिप को ध्यान में रखकर तैयारी चल रही है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी और भाजपा अपना-अपना फर्जी सर्वे कराके खुद को जीता हुआ बता रही हैं। कांग्रेस छूठा सर्वे नहीं कराती। कांग्रेस का सर्वे चल रहा है जो प्रामाणिकता के साथ मीडिया के सामने पेश किया जाएगा।
विज्ञापन

'हां भैया मोदी ने तो कमाल ही कर दिया'

‘अरे मोदी सरकार ने तो पेट्रोल की कीमत सस्ती कर दी, हां भाई अभी तक यही सुनने में आता था कि पेट्रोल की कीमत कम हो ही नहीं सकती। हां भैया मोदी ने तो कमाल ही कर दिया। सब्जियां भी सस्ती हो गईं। भाई अब तो बड़े ही मजे हैं, 2022 तक हमारे सर के ऊपर भी छत होगी। मोदी जी ने वादा किया है कि हर परिवार को घर देंगे।’

इस तरह की चर्चा और बहस अब पंसारी के दुकान, नाई की दुकान, चाय की दुकान व नुक्कड़ पर चर्चा का विषय बनेगा। मोदी का विजन इस तरह से टॉक ऑफ द टाउन कराने की रणनीति पर भाजपा काम कर रही है। आप को चुनौती देने के लिए भाजपा ने आम आदमी से ही भाजपा की चर्चा कराने की रणनीति तैयार की है।

ताकि चुनाव में प्रधानमंत्री की छवि का लाभ मिले। जिस तरह से लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी की चर्चा हर चाय की दुकान पर हो रही थी उसी तरह प्रदेश भाजपा नाई की दुकानों पर चर्चा छेड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

फिर भी ये अड़चन
आगामी विधान सभा चुनाव में बहुमत मिलने के बड़े-बड़े दावे कर रही दिल्ली प्रदेश भाजपा को दोहरा झटका लगा। एक ओर सोमवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की बैठक को उत्तरी निगम के पार्टी के पार्षदों ने गंभीरता से नहीं लिया, वहीं दूसरी ओर सदस्यता अभियान शुरू होने के बावजूद अधिकतर पार्षद इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं।

भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने सोमवार को सिविक सेंटर में उत्तरी निगम के अपने पार्षदों के साथ बैठक तय की थी। इसमें पूर्वी और दक्षिण निगम के मेयर व स्थायी समिति अध्यक्ष भी मौजूद थे। मगर जब प्रदेश अध्यक्ष वहां पहुंचे तो उन्हें निराशा हाथ लगी। बैठक में 63 में से 23 पार्षद नहीं आए।

सतीश उपाध्याय ने इस पर नाराजगी जताई और बैठक में नहीं आने वाले पार्षदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश सदन की नेता मीरा अग्रवाल को दिया। दूसरी ओर, पार्टी के सदस्यता अभियान का हश्र देखकर उन्होंने पार्षदों को फटकारा।

बताया गया कि प्रदेश अध्यक्ष पार्षदों को संदेश देने आए थे कि वह अपने इलाके के अधिकतर लोगों को पार्टी का सदस्य बनाएं। इसी बीच उन्हें पता चला कि उनके पार्षदों ने ही अभी तक पार्टी के सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है। इन पार्षदों में एक नगर निगम का मेयर भी शामिल है। उपाध्याय की फटकार के बाद कुछ पार्षदों ने बैठक में ही मोबाइल से मिस कॉल कर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्षदों की कार्यशैली को देखकर असंतोष जताया। उन्होंने पार्षदों को चेतावनी दी कि विधानसभा चुनाव के दौरान जिस भी पार्षद के वार्ड में पार्टी की हार होग, उसके भविष्य पर ब्रेक लग जाएगा। उन्होंने लोगों की समस्याओं का समाधान करने और उन्हें पार्टी से जोड़ने के लिए युद्घ स्तर पर कार्य करने का आदेश पार्षदों को दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें