अरविंद केजरीवाल के बेल बांड न भरने पर जेल जाने का कदम भी आम आदमी पार्टी के खिलाफ जाता दिख रहा है। शुक्रवार को पीएसी की बैठक में हंगामे के बाद आज आप की वरिष्ठ नेता शाजिया इल्मी के पार्टी छोड़ने पर आप के चुनावी परिणामों से बेचैन विपक्षी दलों को मानो संजीवनी मिल गई है।
आप के कुनबे के टूटने से विपक्ष ने उस पर हमले तेज कर देने की तैयारी की है। इस कड़ी में भाजपा व कांग्रेस दोनों ही आप के उठाए गए कदमों को जनता के बीच मजबूती से उठाने की तैयारी में जुट गए हैं। आप ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव में अद्भुत कर 28 सीटें लेकर दूसरा स्थान पाया तो 32 सीटें लेने वाली भाजपा व सबसे बुरी हार देखकर मात्र 8 सीटों पर रहने वाली कांग्रेस में बेचैनी शुरू हो गई।
इसके बाद सरकार बनाने से भाजपा के इंकार के बाद एक रणनीति के तहत कांग्रेस ने आप को समर्थन देकर उसकी सरकार बनवाई और तमाम राजनैतिक उठा पटक के बाद आप ने जन लोकपाल बिल पास न होने पर जनवरी 2014 में इस्तीफा दे दिया था।
AAP के अपने ही खड़ी कर रहे हैं मुश्किलें
आप ने सरकार से हटने को आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव में इसे फायदे का सौदा माना था लेकिन भाजपा व कांग्रेस ने यहां से ही इस मुद्दे पर आप पर घेरा मजबूत कर दिया।
लोकसभा चुनाव में दिल्ली में आप के करीब 33 फीसदी मत हासिल करने पर भाजपा में सभी सातों सीटें जीतने के बाद भी बेचैनी थी। अब गडकरी के मानहानि मामले में केजरीवाल के बेल बॉंड न भरने पर भी भाजपा इसको लेकर परेशान थी कि कहीं केजरीवाल को इसका फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में न हो जाए।
लेकिन अब केजरीवाल के जेल व धरने की राजनीति को आप की संस्थापक सदस्य शाजिया इल्मी के गलत ठहराने व पार्टी छोड़ने पर भाजपा में उत्साह है।
मोदी लहर में विधानसभा वैतरणी पार करने की कोशिश
भाजपा मोदी लहर में ही जल्द विधानसभा चुनाव कराकर अपनी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को नितिन गडकरी के आवास पर दिल्ली प्रदेश के नेताओं ने इसपर मंथन किया और उसकी सबसे बड़ी चिंता आप ही रही। लेकिन यह भी तय किया गया कि सरकार छोड़ने के केजरीवाल के फैसले को जिस तरह से भाजपा ने भुनाया ठीक उसे तरह कानूनी प्रक्रिया न मानकर जेल जाने को केजरीवाल के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है।
यहां पर आप के कुछ नेताओं के टूटने की सूचना पर भी चर्चा हुई तो भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा होने पर उसे आप के खिलाफ अजमाया जाने वाला सबसे बड़ा हथियार करार दिया। पार्टी आप के खिलाफ पोस्टर व होर्डिंग वार से वोटरों को जागरूक करेगी।
कांग्रेस भी इसे अपना टूटा जनाधार जोड़ने का आधार मान रही है और उसकी बैठकों का दौर जारी है। सूत्रों का यह भी बताना है कि आप के कुछ विधायकों व नेताओं को भी समझाने की कोशिश विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा की जा रही है।
किरण आई तो साथ हो सकती है शाजिया
दिल्ली के अन्ना आंदोलन से जुड़ी रही देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी व पूर्व टीवी पत्रकार शाजिया इल्मी के बीच आंदोलन के दौरान काफी संपर्क रहा है।
समझा जा रहा है कि भाजपा अगर किरण बेदी को अपना सीएम प्रोजेक्ट करती है तो शाजिया उनके साथ आ सकती है। वैसे शाजिया ने किसी अन्य दल में जाने को लेकर अभी फैसला न लेने व आप में आने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया है।