लोकसभा चुनाव में बृहस्पतिवार को राजधानी में मतदान के दौरान कई सीटों पर या तो मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण दिखा या कुछ सीटों पर उसका झुकाव गैर भाजपाई जिताऊ उम्मीदवार की तरफ रहा।
वहीं, पोलिंग बूथों पर झुग्गी झोपड़ी वालों सहित निचले तबके के वोटर ‘आप’ की पैरवी करते दिखे। मोदी फैक्टर भी कायम रहने पर अधिकांश सीटों पर भाजपा व ‘आप’ के बीच कड़ा मुकाबला दिख रहा है।
‘आप’ की 49 दिन की सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कई विवादों में घिरे रहे। दिल्ली में रोड शो के दौरान उन पर कई हमले भी हुए। विपक्ष झूठे वादों का आरोप भी लगाता रहा।
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चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं की खामोशी सस्पेंस बनाए हुए थी। नॉर्थ ईस्ट, चांदनी चौक व ईस्ट दिल्ली में मुस्लिम मतदाता एकतरफा जाने पर निर्णायक स्थिति में माने जाते हैं। अन्य चार सीटों पर भी मुस्लिम उम्मीदवारों की उपस्थिति है, जो एकतरफा मतदान होने पर किसी का भी पलड़ा भारी कर सकती थी।
कांग्रेस को इन मतों पर पूरा भरोसा था। यहां तक की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कांग्रेस को मत देने की अपील भी की थी, लेकिन मतदान के समय मुस्लिम मतदाताओं पर उसका कोई असर नहीं दिखा।
राजधानी में भाजपा और ‘आप’ में क्लोज फाइट दिख रही है जबकि कांग्रेस एक-दो सीट पर ही मुख्य मुकाबले में नजर आई। यह बात अलग है कि अभी भी विजेता की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।