उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच शक्तियों को लेकर चल रहे विवादों के बीच आए केंद्र सरकार के अध्यादेश पर आम आदमी पार्टी को हाथ का साथ मिलता नजर नहीं आ रहा है।
पार्टी को उम्मीद थी कि बिहार में हुई विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस साथ देगी, लेकिन बैठक में पत्ते ही नहीं खुले। कांग्रेस ने न तो हां किया और न ही विरोध, कांग्रेस के मौन से आम आदमी पार्टी पशोपेश में है। सूत्र बताते हैं कि दोनों की दूरियों को पास लाने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप किया और कहा कि राहुल गांधी और केजरीवाल को उसी आयोजन में दोपहर के भोजन के लिए एक साथ बैठना चाहिए, ताकि सभी मुद्दों का समाधान हो सके।
मगर कांग्रेस उसके लिए भी तैयार नहीं हुई। बैठक को लेकर मीडिया में जारी हुई प्रेस रिलीज में अध्यादेश को लेकर कोई जिक्र नहीं किया। वहीं बैठक में शामिल हुए शरद पवार, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, अखिलेश यादव व अन्य के कहने पर भी कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे राहुल गांधी व मल्लिकाअर्जुन खड़गे ने इस पर अपना रुख अख्तियार नहीं किया। जबकि आम आदमी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस कम से कम स्पष्ट करे कि वह इसके पक्ष में है या विपक्ष में।
आप पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अगर आम आदमी पार्टी को अध्यादेश मामले में राज्यसभा में सपोर्ट नहीं करती है तो वह स्पष्ट रूप से इस बात को जनता के सामने सार्वजनिक करे। अगर कांग्रेस एक-दो दिन के भीतर अध्यादेश के खिलाफ समर्थन की बात स्पष्ट नहीं करती है तो इसे लेकर आम आदमी पार्टी आने वाले समय में आगे की रणनीति पर फैसला लेगी।
ऐसी भी क्या दूरी
पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के लिए आप तो तैयार है, लेकिन कांग्रेस साथ देना नहीं चाहती। शायद यही कारण है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल के साथ चाय पीने के लिए समय देने को भी तैयार नहीं हुए। जबकि आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल राहुल गांधी से सभी मतभेदों को भूलकर एक साथ आगे बढ़ने को कहते रहे। केजरीवाल ने अध्यादेश के मामले पर सीधे राहुल गांधी से बात की। कोई मुद्दा है तो उसे सुलझाने की भी अपील की। ऐसे में अब देखना होगा कि आम आदमी पार्टी शिमला में होने वाली विपक्षी दलों की अगली बैठक को लेकर क्या फैसला लेती है।
हर संकट में कांग्रेस के साथ खड़ी रही आप
बैठक के दौरान मौजूद सभी शीर्ष विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस से अध्यादेश पर अपना रुख स्पष्ट करने और चर्चा के लिए एक बैठक तय करने का आग्रह किया था। आप सूत्र ने यह भी कहा कि पार्टी प्रमुख केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हमेशा संकट के समय कांग्रेस के साथ खड़ी रही है। जब राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी, तब भी केजरीवाल ने इसका सबसे पहले ट्वीट कर विरोध किया था।