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अपना गढ़ भी नहीं बचा पाई आम आदमी पार्टी

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अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी को जहां से सबसे ज्यादा उम्मीदें थीं वहीं से उसे सबसे तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली लोकसभा की सातों सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हार रहे हैं।
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हालांकि वोटों की गिनती अभी भी चल रही है लेकिन पार्टी दफ्तर में उदासी का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है। आम आदमी पार्टी को उत्तर पश्चिम दिल्ली और दक्षिण दिल्ली से उम्मीद थी। एग्जिट पोल में भी इन्हीं दो सीटों पर पार्टी को जीतते हुए दिखाया गया था।
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7-0 से 0-7 पर पहुंची कांग्रेस

कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी बड़े झटके से कम नहीं है। 2009 में दिल्ली की सातों सीट पर कांग्रेस विजयी हुई थी। नई दिल्ली से अजय माकन और चांदनी चौक से कपिल सिब्बल जीतकर मंत्रिमंडल में अहम मंत्री भी बने थे।

इसके बावजूद ये दोनों अपनी सीट नहीं बचा पाए। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अजय माकन और कानून मंत्री कपिल सिब्बल तीसरे नंबर पर पहुंच गए।
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क्या हर्षवर्धन केंद्र की राजनीति में जाएंगे?

चांदनी चौक संसदीय सीट से जीतकर आने वाले हर्षवर्धन अब राज्य की राजनीति छोड़कर केंद्र में जाएंगे या उन्हें आम आदमी पार्टी को रोकने के लिए दिल्ली की राजनी‌ति में ही रखा जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में हर्षवर्धन स्वास्‍थ्य मंत्री बनाए गए थे।

आने वाले महीनों में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाला है। जिसे लेकर बीजेपी हर्षवर्धन को राज्य की राजनीति में ही रहने दे। हर्षवर्धन के चले जाने से दिल्ली में बीजेपी को ठोस नेतृत्व देने वाले नेता की कमी खलेगी।
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