सिविल सेवा परीक्षा के बहाने ‘आप’ ने कांग्रेस और भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव की सीधी जिम्मेदारी तत्कालीन यूपीए सरकार पर डाली है।
साथ ही छात्रों के विरोध प्रदर्शन की अनदेखी का आरोप एनडीए सरकार पर लगाया है। पार्टी ने केंद्र सरकार से तुरंत समाधान करने की मांग की है।
‘आप’ का आरोप है कि 2011 में सी-सैट प्रणाली लागू करने के दौरान कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने यूपीएससी पर दबाव डाला था।
'सियासी फायदा उठाना चाहती है कांग्रेस'
हैरानी की बात यह है कि इस मसले पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं ने उस समय चुप्पी साध रखी थी। अब जब छात्रों का धैर्य जवाब दे गया तो कांग्रेस इसका सियासी फायदा उठाना चाहती है।
वहीं पार्टी का कहना है कि मौजूदा सरकार इस मामले के बेहद हल्के अंदाज में ले रही है। आलम यह है कि अभी तक विरोध कर छात्रों को कोई मंत्री आश्वस्त नहीं कर सका है।
‘आप’ की मांग है कि सबसे पहले प्रारंभिक परीक्षा स्थगित हो, फिर ऑनलाइन एडमिट कार्ड जारी करने के मामले की भी जांच हो।
पुलिस की चुप्पी से संदेह
पार्टी का आरोप है कि राजधानी में अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ते मामलों पर पुलिस चुप्पी संदेह पैदा करती है। पिछले दिनों अपराध की कई घटनाओं में भाजपा कार्यकर्ताओं का नाम आया, लेकिन पुलिस उन पर कार्रवाई करने से डर रही है।
‘आप’ ने भाजपा से दस सवाल किए हैं। इनमें राजेंद्र नगर के विधायक आरपी सिंह के कार्यालय में जल बोर्ड के जूनियर इंजीनियर की पिटाई और कोटला मुबारकपुर में नॉर्थ ईस्ट के छात्र की हत्या का मामला शामिल है। इन दोनों मामले में पुलिस ने ठोस कदम नहीं उठाए।