काला पहाड़ के दामन में बसा मेवात का पहला आदर्श गांव नोटकी अब सौंदर्यीकरण के मामले में फिसड्डी गांवों की फेहरिस्त में शामिल है। इस गांव को 26 जनवरी 2010 को निर्मलता के लिए जिला स्तर पर मंत्री ने सम्मानित किया था।
कई बार प्रदेश स्तर पर भी यह गांव निर्मल भारत अभियान की लिस्ट में शामिल रहा। आजकल मुख्य गलियों में इतनी गंदगी है कि लोग मुंह पर रुमाल रखकर निकलते हैं।
अभी भी एक दर्जन घरों में शौचालय नहीं बने हैं। वहीं सहगल फाउंडेशन द्वारा निर्मल और आदर्श बनाए गए नोटकी को डीआरडीए ने आदर्श गांव की सूची से बाहर कर दिया है।
साल 2007 से 2009 तक एनजीओ सहगल फाउंडेशन ने इस गांव के प्रत्येक घर में निजी शौचालय किफायती दरों पर तैयार करके दिए। उस वक्त असरी गांव की सरपंच थी, उसके बाद उनका बेटा उमर मोहम्मद साल 2010 में सरपंच बना।
करीब सवा करोड़ की लागत से नोटकी में सभी गलियां पक्की, हरेक घर में शौचालय, गलियों के दोनों तरफ पौधे, सवा चार एकड़ में बाग, स्कूल सौंदर्यीकरण, डिलीवरी हट, एक दर्जन सोलर लाइट, शॉकपिट व अत्याधुनिक सुविधाएं ग्रामीणों को उपलब्ध कराईं।
यहीं नहीं नोटकी को देखने के लिए देश-प्रदेश की कई बड़ी टीमें भी आई थीं। गांव की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के लिए पत्रिका भी छपी। इन दिनों गांव की गलियों में कीचड़ और गंदा पानी भरा रहता है, मजबूरन ग्रामीणों को इसी गंदगी से निकलना पड़ता है।
गांव में 212 घर और 1467 लोगों की जनसंख्या है। खंड के गांव नोटकी के युवा सरपंच रिजवान कहते हैं कि गंदा पानी एक नाले में नालियां बनाकर डाला जाएगा। बीडीपीओ रतन सिंह ने कहा कि साफ सफाई के लिए नई पंचायत के साथ बैठक की जाएगी।