मेरठ रोड पर केमिकल और गत्ता फैक्ट्री में लगी आग की सूचना फायर ब्रिगेड को काफी देर से मिली। इसके अलावा केमिकल की आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड के फोम टेंडर नहीं हैं। अगर फोम टेंडर होते और जल्दी सूचना मिल जाती तो आग पर काबू पाया जा सकता था।
दरअसल, जिस दौरान हादसा हुआ दोनों फैक्ट्रियां बंद थीं। जब फैक्ट्रियों से लपटें उठने लगीं, तब लोगों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन केमिकल की आग तब तक विकराल हो चुकी थी, जिसे बुझाने के लिए रात साढ़े 12 बजे तक फायर ब्रिगेड जुटी थी, मगर आग पर काबू नहीं पाया जा सका था।
आग इतनी भयंकर थी कि कई किलोमीटर दूर से भी इसकी लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था। आसपास और भी कंपनियां हैं, इस वजह से लोगों को आग फैलने का डर सता रहा है।
मेरठ रोड से आवागमन करने वाले वाहन सवार भीड़ जुटी रही। एफएसओ ने बताया कि आग लगते ही सूचना मिल गई होती तो उसे बुझाना आसान होता।