शिकायतकर्ता की बातों से थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नवीन को मामला संदेहजनक लगा। जांच के लिए क्राइम ब्रांच 65 प्रभारी ब्रह्म प्रकाश की टीम को मौके पर बुलाई गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच में पाया कि नवीन द्वारा दी गई शिकायत झूठी है। नवीन ने बताया कि वह फरीदाबाद से जयपाल की कंपनी से कुछ सामान लेकर जा रहा था। उसने बाद में पैसे देने की बात कही, लेकिन जयपाल ने बात नहीं मानी और सामान वापिस उतरवा लिया था।
आरोपी कारोबारी ने बताया कि बदला लेने के लिए नवीन ने जयपाल व उसके साथी के खिलाफ झूठी शिकायत दी थी। उसकी निशानदेही पर नोएडा के उसके मकान से 10 लाख रुपए बरामद किए गए। पुलिस ने नवीन के खिलाफ झूठी शिकायत देखकर पुलिस को गुमराह करने और पुलिस तथा अदालत का समय बर्बाद करने के आरोप में नवीन के खिलाफ केस दर्ज किया गया। आरोपी ने बताया कि उसने टीवी शो क्राइम पेट्रोल देखकर जयपाल को फंसाने की योजना बनाई थी।
झूठी शिकायत देने के आरोप में चार महीने में 84 केस दर्ज
पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि पुलिस आयुक्त ने झूठी शिकायत देकर निर्दोष को सजा दिलाने पुलिस व अदालत का वक्त बर्बाद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि झूठी शिकायतों से निर्दोष व्यक्ति को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार बीते चार महीनों में झूठी शिकायत देने वालों के खिलाफ 84 केस दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस आयुक्त ने चेतावनी देते हुए कहा है कि कोई भी व्यक्ति अपने फायदे के लिए इस प्रकार की हरकत न करे।