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जेल जाएंगे 650 वाहन मालिक

Mon, 07 Apr 2014 02:45 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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लोकसभा चुनावों में वाहन देने का भरोसा देकर गायब होने वालों पर चुनाव आयोग की नजर भी तिरछी हो गई है।
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ऐसे वाहन स्वामियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजने की अनुमति चुनाव आयोग ने प्रदान कर दी है। आरटीओ की रिपोर्ट पर डीएम ने इनके खिलाफ कार्रवाई की अनुमति चुनाव आयोग से मांगी थी।

शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक वाहन सरकारी संपत्ति है। जरूरत पड़ने पर किसी के भी निजी-पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अधिकारी ले सकते हैं। चुनावों के लिए करीब आठ हजार वाहनों की जरूरत पड़ती है।
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मानकों के अनुसार प्रशासन तीन गुना वाहनों को कब्जे में लेकर रखता है। दो तिहाई वाहनों को रिजर्व रखा जाता है। चुनाव ड्यूटी के लिए वाहनों को एक महीने से अनुबंधित कर लिया गया था।

इनके कागजात कब्जे में लेकर मालिकों को वाहनों के पुलिस लाइन पहुंचने की तारीख बता दी गई थी। वाहन स्वामियों ने स्वीकृति भी प्रदान कर दी थी, लेकिन इनमें से कई अपने वाहनों को लेकर पुलिस लाइन नहीं पहुंचे।

इससे चुनाव की शुरूआती व्यवस्था में अफसरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार तक ऐसे 650 वाहनों को चिंहित कर लिया गया था, जो कि ड्यूटी पर नहीं पहुंचे।

आरटीओ के आग्रह पर डीएम ने ऐसे वाहन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति चुनाव आयोग से मांगी थी। वहां से कार्रवाई की अनुमति प्रशासन को मिल गई है।

ऐसे में इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का रास्ता साफ हो गया है। चुनाव में व्यवधान उत्पन्न करने की साजिश की धाराओं में इन पर कार्रवाई की तैयारी है। ऐसे में इनको छह माह तक जेल में रहना पड़ सकता है।
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वाहन स्वामियों की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने इनके वाहन सीज कराने और वाहन स्वामियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। 650 वाहन स्वामियों के खिलाफ चुनाव अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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