अनधिकृत तौर पर पूर्वी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में संचालित होने वाली करीब 6000 फैक्ट्रियों पर सीलिंग की गाज गिरेगी। इसके लिए पूर्वी निगम ने तैयारियां पूरी करने के बाद चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले दो दिनों के दौरान निगम क्षेत्र रामनगर, बाबरपुर, कृष्णानगर, विश्वासनगर, जगतपुरी सहित दर्जनों जगहों पर सीलिंग की कार्रवाई करते हुए फैक्ट्रियां सील कर दी गई।
सीलिंग की कार्रवाई में हो रही देरी की वजह से अब भी निगम क्षेत्र की कॉलोनियों में हादसों का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसने के लिए कार्रवाई तेज करते हुए शनिवार को केशवपुरम जोन में 25 और करोल बाग क्षेत्र में 11 प्रॉपर्टी पर कार्रवाई की। निगम की ओर से होने वाली कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
वर्ष 2004 में दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डवलेपमेंट कॉरपोरेशन (डीएसआईआईडीसी) ने तीनों निगमों को अनधिकृत कॉलोनियों में संचालित होने वाली 51000 फैक्ट्रियों को रिहायशी क्षेत्रों से हटाने के निर्देश दिए गए थे। इस दौरान 22000 फैक्ट्रियों को विस्थापित करने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में प्लांट आवंटित किए गए। इसके बावजूद 29000 फैक्ट्रियां रिहायशी इलाके में संचालित हो रही थीं।
पूर्वी निगम क्षेत्र में ऐसी करीब 6500 फैक्ट्रियों की पहचान की गई थी जो अनधिकृत कॉलोनियों में संचालित हो रही थीं। निगम ने पहले चरण में करीब 225 फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की। निगम अधिकारी के मुताबिक 6500 में से 500-600 फैक्ट्रियां बंद हो गईं। इसके बावजूद करीब 6000 फैक्ट्रियों को विस्थापित नहीं किया गया। पिछले दिनों मोतीनगर में हुए हादसे में हुई मौत के बाद उत्तरी और पूर्वी निगम ने सीलिंग की कार्रवाई तेज कर दी है।
रिहायशी क्षेत्रों में अब भी मंडरा रहा है खतरा
जिन फैक्ट्रियों का रिहायशी क्षेत्र में संचालन बंद नहीं किया गया, उन पर जल्द ही पूर्वी निगम की गाज गिरेगी। उपायुक्त संजीव कुमार ने बताया कि सीलिंग की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। नॉन कनफर्मिंग एरिया में संचालित होने वाली कंपनियों से कई तरह के हादसों का भी खतरा है।