फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) बनवाकर जे एंड के बैंक से करीब 60 करोड़ रुपये का फर्जी पेमेंट किया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह फ्रॉड गाजियाबाद ब्रांच में 2010 से शुरू हुआ।
जिस तरह से बैंक द्वारा पेमेंट किया गया उसमें बैंक के अधिकारी भी शक के दायरे में हैं। शुरुआती जांच के बाद बैंक मैनेजर एके भट्ट समेत बैंक के वाइस प्रेजीडेंट वीके खजांची को बर्खास्त किया जा चुका है।
मामले की तहरीर दो माह पहले घंटाघर कोतवाली में भी दी गई है। अब मामला लोक अदालत में है। उधर, घंटाघर कोतवाली के एसओ धीरेंद्र यादव का कहना है कि बैंक की तरफ से कोई भी तहरीर नहीं दी गई है।
यदि बैंक प्रबंधन शिकायत करेगा तो मामले की जांच की जाएगी। बता दंे कि पहले ये घोटाला 150 करोड़ का माना जा रहा था लेकिन जांच में ये 60 करोड़ का निकला।
बैंक सूत्रों के मुताबिक अंबेडकर रोड स्थित बैंक शाखा में यह घोटाला सुनियोजित ढंग से किया गया। घोटाले में फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट को आधार बनाकर गया।
बताया जा रहा है कि गाजियाबाद की कुछ फर्मों ने बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट बनवाया और उसे बैंक में जमा कराया।
बैंक शाखा के अधिकारियों ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी पर कुछ नहीं हुआ। 2010 से फर्जी एलसी के जरिये पेमेंट होता रहा।
इसी फर्जी एलसी के आधार पर बैंक की राजेंद्र नगर शाखा में भी घोटाला हुआ। उधर बैंक अधिकारियों के मुताबिक घोटाला 60 करोड़ रुपये का हुआ है।
जिसकी जांच जारी है। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए उसके आधार पर बैंक के तीन लोगों पर कार्रवाई हुई है।