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कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, अब चलेगी रोडवेज

Tue, 21 Jan 2014 05:53 PM IST
अमर उजाला, गुड़गांव
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रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल ने गुड़गांव के करीब 560 को बड़ी सौगात देते हुए उनकी बल्ले-बल्ले कर दी है। इन कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से ही पक्का कर दिया गया है। ये कर्मचारी अब विभाग में स्थाई भर्ती के सभी लाभ उठाने में सक्षम होंगे।
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इन लोगों को प्रमोशन और रिटायर्डमेंट में इस सौगात का पूरा लाभ मिलेगा। हालांकि शर्त के अनुसार इन्हें किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं दिया जाएगा। हड़ताली कर्मचारियों के तेवरों से पस्त हुई सरकार ने सोमवार की देर रात तालमेल कमेटी के सदस्यों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया।

वार्ता के सूत्रधार सरकार के संकट मोचक के रूप में काम करने वाले उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला बने। उन्हीं के निवास पर बैठक रात करीब 11:30 बजे तक चली। गुड़गांव डिपो के प्रधान ओमप्रकाश ने बताया कि सरकार ने 1993, 2003 और 2008 में भर्ती हुए करीब 8500 कच्चे चालक-परिचालकों को तत्काल पक्का करने की मांग मान ली।
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हालांकि उन कर्मचारियों को उस समय के हिसाब का किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि एक जनवरी से ये कर्मचारी विभाग की मुख्यधारा में आ गए हैं। एक जनवरी से इनका वेतन भी छठे वेतन आयोग के तहत ही मिलेगा। ओमप्रकाश ने बताया कि वर्ष 1993 और 2003 में करीब 200-200 और वर्ष 2008 में 71 परिचालक और 91 चालक भर्ती किए गए थे।

ये अभी तक पक्के नहीं हो पाए थे। रोडवेज कर्मचारी इनके हितों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने बताया कि निजी ऑपरेटर को देने वाले परमिट की मांग पर एक कमेटी बनाई गई है। उक्त कमेटी तीन महीने में परमिट पर रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि उम्मीद है परमिट रद्द कर दिए जाएंगे।

प्रमोशन में मिलेगा लाभ
ओमप्रकाश ने कहा कि यह सही है कि उक्त कर्मचारियों को आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन प्रमोशन आदि में उन्हें वरिष्ठता मिलेगा। इस शर्त पर ही  आर्थिक लाभ की शर्त की नजरांदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग में अब जो भी पदोन्नति होगी, इन कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची तैयार की जाएगी। उसी आधार पर उन्हें निरीक्षक व दूसरे पदों पर पदोन्नत किया जाएगा।

खुशी के बीच गम भी साल रहा
विभाग में स्थायित्व पाने वाले कर्मचारी यूनियन और सरकार के फैसले से खुशी तो हैं, लेकिन इस खुशी के बीच उन्हें कहीं न कहीं कोई गम भी साल रहा है। लेकिन अपने गम को ये पक्का होने के पीछे छुपा दे रहे हैं। अमर उजाला ने ऐसे कुछ कर्मचारियों की खुशी को सांझा करने का प्रयास किया है।

वर्ष 2008 में भर्ती हुए रविंद्र कहते हैं कि कच्चा रहने से यह सौगात भी भली है। कम से कम स्थाई होने का मौका मिला। पदोन्नति आदि में लाभ मिलेगा। अब नौकरी से निकाले जाने का डर नहीं सताएगा। प्रदीप मनुदेव ने इससे खुश हैं, लेकिन थोड़ा आहत भी हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक लाभ आधा भी दे दिया जाता तो अच्छा होता।

इन लोगों ने ठेठ हरियाणवी भाष में इसे पूरी रोटी की जगह टुकड़ा पकड़ाने के जुमले से जोड़ा। अनिल ने कहा कि यह कर्मचारियों के हित में लिया गया फैसला है। यह फैसला पहले आ जाता तो लोगों को परेशानी नहीं उठानी पड़ती।

तो सरकार पर पड़ता 200 करोड़ का भार
ओमप्रकाश ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अगर  प्रदेश के सभी कर्मचारियों को आर्थिक लाभ दिया जाता तो सरकार पर 200 करोड़ का भार पड़ता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पीएस ने इसके बारे में उन्हें पूरी जानकारी दी है। इसकी भरपाई के लिए इन लोगों को पदोन्नति में वरिष्ठता देने पर विचार किया जाएगा।
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