किरण बेदी के आने से पहले दिल्ली की राजनीति में बीजेपी में किसी सशक्त दावेदार के न होने और कांग्रेस के बैकफुट पर होने के कारण आप ही एकमात्र दावेदार दिख रही थी।
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किरण बेदी वाकई में भाजपा का ट्रंप कार्ड बनकर दिल्ली की राजनीति में उतरी हैं, राजधानी के सियासी गलियारों में कोहराम सा मचा हुआ है। किरण के आने के बाद से उनकी और केजरीवाल की चुनावी जंग ने चुनाव काफी रोचक बना दिया है।
पहले एक-दूसरे के साथी रहे बेदी और केजरीवाल अब एक दूसरे के आमने-सामने हैं। ऐसे में कई चीजें हैं जो दोनों के बीच में एक जैसी हैं। हम यहां ऐसी 5 समान बातें बता रहे हैं जो दोनों के बीच में कॉमन हैं।
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दोनों का आईआईटी लिंक
दोनों ही पढ़ाई में काफी अच्छे रहे हैं और अपनी शिक्षा को काफी सीरियसली लिया है। केजरीवाल और बेदी दोनों ही देश के टॉप शिक्षण संस्थान आईआईटी में पढ़ चुके हैं।
अरविंद केजरीवाल ने आईआईटी खड़कपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। हालांकि किरण बेदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रैजुएशन किया है, मगर उन्होंने अपना सामाजिक विज्ञान में पीएचडी आईआईटी दिल्ली से किया है।
दोनों ही थे प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, पर बाद में छोड़ा
बता दें कि केजरीवाल और बेदी दोनों ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रह चुके हैं। बेदी ने आईपीएस 1973 में ज्वाइन किया था। बेदी भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए जानी जाती हैं।
उन्होंने दिल्ली पुलिस में भी कई बड़े कदम उठाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किरण बेदी का नाम क्रेन बेदी भी पड़ जब उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी की कार उठवा ली थी।
हालांकि 2007 में उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़ दी क्योंकि उनका कहना था कि वह और कई काम करना चाहती हैं। जबकि उनके ऊपर आरोप लगता है कि उन्हें कमिश्नर की पोस्ट पर प्रमोशन नहीं मिला इसलिए उन्होंने त्यागपत्र दिया।
केजरीवाल की बात की जाए तो उन्होंने 1995 में केवल ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स बनने के लिए आईआरएस(इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज) ज्वाइन की थी। हालांकि उन्होंने ने भी टीम अन्ना में शामिल होने के बाद अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।
दोनों ही टीम अन्ना में थे
कहा जाता है कि असल मायने में अरविंद केजरीवाल तब मशहूर हुए जब उन्होंने अन्ना हजारे के साथ दिल्ली में अनशन करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। अन्ना आंदोलन में किरण बेदी भी पूरे समय साथ-साथ रही थीं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
हालांकि दोनों ने ही समय आने पर अन्ना को धोखा देते हुए अपने राजनीतिक करियर को महत्व दिया राजनीति में आ गए। बता दें कि कुछ समय पहले जब अन्ना से किरण और केजरीवाल के बारे में बात की गई तो उन्होंने कोई उत्तर ना देते हुए पत्रकारों के मुंह पर दरवाजा बंद कर दिया।
बेदी को नाचना तो केजरीवाल को पसंद है गाना
कौन भूल सकता है कि किस तरह केजरीवाल ने अपनी रैलियों में गाने गाए थे। साथ ही साथ उनके शपथ-ग्रहण समारोह में जिस तरह उन्होंने गाकर पूरी दिल्ली को सुनाया था।
हालांकि केजरीवाल को उनके गाना गाने के प्रयास के लिए तो पूरे दस अंक मिलने चाहिए। वहीं अगर उनकी गायकी की बात की जाए तो उन्हें सुनने वाला कोई भी व्यक्ति उनकी मधुरता के लिए उन्हें 2 से अधिक नंबर नहीं देगा।
वहीं कुछ लोगों को बेदी का डांस बुहत पसंद है। उनकी नाचने की ललक अन्ना की कई रैलियों में दिख चुकी है। कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि उनके डांस मूव्स ऐसे रहे कि 90 के दशक की बॉलीवुड कोरियोग्राफर्स भी शरमा जाएं।
दोनों का ही तिहाड़ जेल से गहरा नाता रहा है। किरण बेदी 1993 से 1995 तक तिहाड़ जेल की इंस्पेक्टर रहीं। इसी दौरान उन्होंने जेल में बंद कैदियों के लिए कई प्रोग्राम चलाए, जिसमें योग क्लासेस और मेडिटेशन भी शामिल हैं।
जबकि केजरीवाल तिहाड़ जेल कैदी बनकर गए थे। नितिन गडकरी मानहानि मामले में मुचलका न भरने के कारम अदालत ने उन्हें जेल प्रवास का आदेश दिया था। बाद में उन्होंने मुचलका भरा और जेल से रिहा हुए।