फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

5.5 लाख हुए कोरोना मरीज तो कहां होगा इलाज, वेंटीलेटर्स की कमी बनेगी जानलेवा!

Tue, 09 Jun 2020 07:55 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मौजूदा कोरोना पॉजिटिव 17712 लोगों में लगभग 27 फीसदी को बेड्स की जरूरत       
  • 1.8 फीसदी को पड़ रही वेंटीलेटर्स की जरूरत, जुलाई तक चाहिए 6 हजार से ज्यादा वेंटीलेटर्स
  • बड़े होटलों, स्टेडियम में अस्थायी अस्पताल बना सकती है सरकार
विज्ञापन
दिल्ली का अस्पताल - फोटो : File
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को कहा कि जुलाई माह के अंत में राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या 5.5 लाख तक पहुंच सकती है। अनुमान है कि उस समय तक दिल्ली में 80 हजार लोगों को अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।

विज्ञापन


राजधानी में मौजूदा समय में कोरोना बिस्तरों की संख्या नौ हजार से भी कम 8872 है। इसे देखते हुए जुलाई तक अस्पतालों में इतने बेड्स की उपलब्धता सुनिश्चित करा पाना सरकार के लिए बेहद मुश्किल भरा काम साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार बड़े होटलों, प्राइवेट अस्पतालों और कुछ स्टेडियम का टेकओवर कर उन्हें अस्थाई अस्पताल में तब्दील कर सकती है।
विज्ञापन


लेकिन कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए वेंटीलेटर्स की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि जुलाई के अनुमानित मरीजों की जरूरत की तुलना में राजधानी में इस समय दस फीसदी वेंटीलेटर्स भी उपलब्ध नहीं हैं।     
 
दिल्ली में कुल कोरोना मरीजों में स्वस्थ होने की रफ्तार लगभग 38 फीसदी बनी हुई है। अगर कुल मरीजों में स्वस्थ होने का आंकड़ा इसी रफ्तार में रहा, जिसकी संभावना अधिक है, तो 5.5 लाख कुल मरीजों के होने पर भी लगभग 2.09 लाख मरीज स्वस्थ हो चुके होंगे।

इस तरह उस समय कुल पॉजिटिव लोगों की संख्या लगभग 3.41 लाख के करीब हो सकती है।
 
आंकड़े बताते हैं कि 17712 सक्रिय मरीजों में लगभग एक चौथाई 4864 लोगों को (27.46 फीसदी मरीजों को) अस्पतालों में बेड्स की जरूरत पड़ रही है।

अगर कुल संक्रमितों में बेड्स की आवश्यकता वाले मरीजों की संख्या इसी दर से बढ़ती रही तो भी जुलाई के अंत तक 90 हजार से अधिक बेड्स की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अनुमान है कि जुलाई तक लगभग 80 हजार बिस्तरों की आवश्यकता पड़ेगी।

इस समय कितने बेड्स

  • दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक दिल्ली में इस समय सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 8872 कोरोना बेड्स उपलब्ध हैं।
  • इनमें 4680 बेड्स भरे हुए हैं, जबकि 4192 बेड्स रिक्त हैं।
  • कुल बेड्स की संख्या में एलएनजेपी के दो हजार बेड्स, जीटीबी अस्पताल के 1500 बेड्स, एम्स दिल्ली के 250 और एम्स झज्जर के 700 बेड्स शामिल हैं।

सरकार बेड्स की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।   

कहां से पूरी होगी जरूरत

बीएल कपूर अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर संदीप नायर के मुताबिक बेड्स की उपलब्धता ज्यादा बड़ा संकट नहीं है। बड़े होटलों, प्राइवेट अस्पतालों और कुछ स्टेडियम को टेक ओवर कर सरकार इस कमी को पूरी कर सकती है।

लेकिन इसके लिए अभी से युद्धस्तर पर प्रयास करने पड़ेंगे। लेकिन वेंटीलेटर्स की कमी आने वाले समय में बड़ी समस्या अवश्य बन सकती है।

  • इस समय राजधानी में कुल 509 वेंटीलेटर्स उपलब्ध हैं। इनमें 320 भरे हुए और 189 रिक्त हैं।
  • एलएनजेपी के 64 में 54, जीटीबी के 53 में आठ, सफदरजंग के 69 में 62 और राम मनोहर लोहिया अस्पताल के 14 में से 12 वेंटीलेटर्स भरे हुए हैं।
  • लेडी हार्डिंग अस्पताल का एक भी वेंटीलेटर फ्री नहीं है।
  • कुल 17712 सक्रिय मरीजों में केवल 320 लोगों को आईसीयू की आवश्यकता पड़ रही है। यह आंकड़ा कुल मरीजों का 1.80 फीसदी का है।

इस दर से जुलाई माह में लगभग 6000 वेंटीलेटर्स से ज्यादा की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन वेंटीलेटर्स की उपलब्धता में जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में सरकार इतने वेंटीलेटर्स उपलब्ध नहीं करा सकती।

विज्ञापन


यानी आने वाले समय में वेंटीलेटर्स की समस्या विकट रूप धारण कर सकती है।
 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें