फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

3700 करोड़ स्कैम : एबलेज कंपनी का 65000 जीबी डाटा हुआ सीज, रकम ठिकाने लगाने वाले बैंकों पर भी शिकंजा

Sun, 05 Feb 2017 07:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
file photo - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि ईमेल की संख्या इतनी ज्यादा है कि एक टीम को अलग-अलग सिस्टम पर ईमेल खोलकर पढ़ने और उसकी जानकारी एकत्र करने के लिए लगाया गया है। ये टीम जिलेवार ठगी का शिकार हुए लोगों की सूची तैयार कर रही है। अब तक की जांच में एसटीएफ एबलजे कंपनी का 65 टीबी (65000 जीबी) डाटा सीज कर चुकी है। एक फरवरी को कंपनी में छापेमारी के बाद से डाटा सीलिंग की कार्रवाई लगातार जारी है। साथ ही कुछ टीमें डाटा एनालिसिस का भी काम कर रही हैं। एसआईटी के अलावा एसटीएफ की दस टीमें जांच में लगी हैं।
विज्ञापन

बैंकों की भूमिका की भी हो रही जांच

anubhav mittal - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक ने बताया कि शनिवार को उन बैंकों की भूमिका की भी जांच शुरू की गई है, जिन्होंने आरोपियों को एसटीएफ द्वारा खातों की जानकारी जुटाने की जानकारी दी थी। इससे आरोपी सतर्क हो गए और तेजी से अपनी रकम ठिकाने लगाने लगे थे। इतना ही नहीं जांच के दौरान कुछ बैंकों ने एसटीएफ को एबलेज कंपनी के खातों की जानकारी देने में भी आनाकानी की है। इनकी शिकायत आरबीआई व बैंक प्रबंधन से की जाएगी। अगर किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी की कंपनी के साथ मिलीभगत मिलती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

आईजी क्राइम के नेतृत्व में एसआईटी गठित

file photo - फोटो : अमर उजाला
नोएडा की एबलेज इन्फो कंपनी द्वारा की गई ठगी की जांच के लिए डीजीपी जावीद अहमद ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दी है। आईजी क्राइम भगवान एस. श्रीवास्तव के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें डीआईजी मेरठ कट्टारपु एस. एमेनुअल, नोएडा के एसपी क्राइम राम यश सिंह, एसटीएफ के डीएसपी राजकुमार मिश्रा, एसटीएफ केनिरीक्षक सत्यवीर सिंह, नोएडा क्राइम ब्रांच के निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह व गोरखनाथ और सूरजपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक मदन पाल शामिल हैं।
विज्ञापन

आयकर को भेजी थी एसटीआर

अनुभव‌ मित्तल - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के दौरान वर्ष 2016 में एबलेज कंपनी के खातों में 26 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। इससे पहले वर्ष 2015 में कंपनी ने मात्र नौ लाख रुपये का कारोबार किया था। नोटबंदी के दौरान उसकेखातों में करोड़ों रुपये आने पर बैंकों की तरफ से इन खातों की संदिग्ध जांच रिपोर्ट (एसटीआर) आयकर विभाग को भेजी गई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें