- मामला वर्ष 1991 का है, जब असिस्टेंट इंजीनियर वीके दत्ता और जूनियर इंजीनियर दिनेश गर्ग पर 1,800 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने रिश्वत मामले में दो इंजीनियरों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया। यह मामला साल 1991 का है, जब असिस्टेंट इंजीनियर वीके दत्ता और जूनियर इंजीनियर दिनेश गर्ग पर 1,800 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। आरोप था कि दोनों ने बकाया बिल पास कराने के बदले यह रकम मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए ट्रैप लगाया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में 2002 में ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था। अब हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत मांगने का पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाया।
कोर्ट ने पाया कि मामले में कई गंभीर कमियां थीं। गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते थे और कई जगह विरोधाभास भी था। इसके अलावा, सरकारी रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि जिस समय रिश्वत मांगने की बात कही गई, उस समय दोनों इंजीनियर अपने काम की जगह पर मौजूद थे। कोर्ट ने कहा कि उस समय ठेकेदार का कोई भुगतान बकाया नहीं था। ऐसे में रिश्वत मांगने का कोई स्पष्ट कारण भी सामने नहीं आता।
जांच एजेंसी कई अहम गवाहों से पूछताछ नहीं कर सकी। अदालत ने कहा कि केवल पैसे की बरामदगी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि वास्तव में रिश्वत की मांग की गई थी। इन्हीं कारणों के आधार पर हाई कोर्ट ने दोनों इंजीनियरों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और उनकी सजा को रद्द कर दिया।