नगर निगम की माली हालत खराब करने में सरकारी महकमों का योगदान कुछ कम नहीं है। एक तरफ नगर निगम कर वसूली के लिए आम जनता को बार-बार नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है, दूसरी तरफ करीब 28 करोड़ रुपया संपत्ति कर दबाए बैठे 30 सरकारी महकमों के आगे निगम बेबस दिखाई दे रहा है। इन महकमों ने कई साल से संपत्ति कर जमा नहीं कराया है।
कंगाली के दौर से गुजर रहा नगर निगम अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दे रहा है। पिछले दिनों वेतन न मिलने से गुस्साए कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा था। स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल नगर निगम के सामने अब शहर के विकास का खाका खींचने के लिए फंड की जरूरत होगी। ऐसे में निगम ने बकायेदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
निगम अधिकारियों के मुताबिक, संपत्ति कर व अग्निशमन शुल्क मिलाकर निगम का कुल 132 करोड़ रुपया बकाया है, जिसमें से 27.82 करोड़ रुपया सरकारी महकमों पर बकाया है। निगम ने बकायेदार विभागों की सूची तैयार कर सरकार को भेज दी है। इसके साथ ही बकाया जमा कराने के लिए विभागों को नोटिस भेजने की तैयारी हो रही है।
हालांकि, लंबे समय से कर न चुकाने वाले बकायेदारों से वसूली किसी चुनौती से कम नहीं होगा। जानकारों की मानें तो संपत्ति कर की बकाया राशि अगर निगम के खजाने में आ जाए, तो आठ महीने के लिए वित्तीय संकट से निजात मिल जाएगी, क्योंकि निगम का हर महीने का खर्च करीब 15 करोड़ रुपये है।
2.46 लाख हैं निगम क्षेत्र में बकायेदार
संपत्ति कर बकाया साल या दो साल का नहीं, बल्कि कई सालों का है। यूं तो निगम के आर्थिक हालात पहले से ही ठीक नहीं रहे हैं, लेकिन अब जब खर्च बढ़ रहा है तो अधिकारियों को बकाया वसूली की याद आई है। कर जमा न करने की आदत बना चुके करीब 100 करोड़ रुपये के आम बकायेदारों के साथ करीब 28 करोड़ रुपये के खास बकायेदारों की याद निगम को आ गई है। निगम क्षेत्र में बकायेदारों की संख्या 2.46 लाख बताई जाती है। अधिकारियों की मानें तो अब कर न चुकाने वाले बकायेदारों की संपत्तियों को सील करने में कोताही नहीं बरती जाएगी।
1.96 लाख लोगों का डाटा ऑनलाइन
अब तक बकायेदारों का पारंपरिक तरीके से बही-खाता तैयार होता रहा है। कागजी रिकॉर्ड जुटाने की लंबी प्रक्रिया के तहत निगम को बकायेदारों से समय पर वसूली करने में अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए अब निगम ने डिजिटलाइजेशन का सहारा लिया है। 2.46 लाख में से 1.96 लाख लोगों का डाटा ऑनलाइन हो चुका है। अब एक क्लिक पर निगम को अपने क्षेत्र के करदाताओं की जानकारी मिल जाएगी।
संपत्ति कर और फायर टैक्स मिलाकर कुल 132 करोड़ रुपये वसूले जाने हैं। इनमें सरकारी विभाग भी शामिल हैं। कर का भुगतान करने के लिए सभी को पत्र लिखा जा रहा है।
-डॉ. आदित्य दहिया, नगर निगम आयुक्त
टॉप-5 सरकारी बकायेदार (आंकड़े लाख में)
बीएसएनएल 766.58
बिजली बोर्ड 452.58
पुलिस थाने 305.57
पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) 289.31
हरियाणा पर्यटन विभाग 255.51