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‘मैं एमपी या एमएलए नहीं हूं तो क्या मेरी बेटी, बेटी नहीं’

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अगर मैं एमपी या एमएलए नहीं हूं तो क्या मेरी बेटी, बेटी नहीं है ? हमारी बेटी सात दिनों से लापता है लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही। यह कहना है इंडिया गेट से लापता बच्ची जाह्नवी के माता-पिता का। उन्होंने परिजनों के साथ सैकड़ों लोगों ने बच्ची की बरामदगी की मांग को लेकर शनिवार शाम इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकालने की कोशिश की।
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हालांकि मार्च की अनुमति न होने के कारण पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन लोगों को जबरन वहां से हटा दिया। पुलिस मार्च निकाल रहे लोगों को बस में भरकर जंतर मंतर रोड ले आई जहां पर कैंडल मार्च निकाला गया।

जाह्नवी की मां शीतल ने बताया कि इंडिया गेट से उनकी बच्ची गायब हुए एक सप्ताह हो गया है लेकिन पुलिस ने अभी तक उसे बरामद करने में कोई तत्परता नहीं दिखाई।
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पुलिस ने मार्च निकालने से इन लोगों को रोका और बच्ची की तलाश करने के लिये दो-तीन का समय मांगा है। बच्ची के मामा तरुण ग्रोवर ने कहा कि पुलिस ने बच्ची की तलाश करने के लिए कुछ समय मांगा है। अगर इसके बाद भी बच्ची नहीं मिलती है तो हम संसद का घेराव करेंगे।

बता दें कि इंडिया गेट स्थित चिल्ड्रन पार्क से 28 सितंबर 2014 की रात 9:15 बजे रघुवीर नगर निवासी जाह्नवी उस समय गायब हो गई जबकि वह मां-बाप के साथ यहां घूमने आई थी।
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हर आठ मिनट में गायब होता है बच्चा

बच्ची के माता पिता राकेश व शीतल आहूजा ने पुलिस को भी बच्ची के गुम होने की सूचना दी। इस बाबत तिलक मार्ग थाने में 29 सितंबर 2014 को एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है लेकिन सात दिनों के बाद भी बच्ची को कोई सुराग नहीं है।

हर आठ मिनट में गायब होता है बच्चा
आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल एक लाख बच्चे गायब हो जाते हैं। इनमें से 45 फीसदी को पुलिस ढूंढ नहीं पाती। संसद में गृह मंत्रालय द्वारा पेश रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2011 से जून 2014 के बीच सवा तीन लाख बच्चे गायब हुए थे। राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक हर आठवें मिनट में देश में एक बच्चा गायब होता है।

इनमें से 55 फीसदी लड़कियां होती हैं। राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां हालात ज्यादा डरावने हैं। यहां हर रोज औसतन 18 बच्चे गायब होते हैं इनमें 4 बच्चों को पुलिस नहीं ढूंढ पाती।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में 6494 बच्चे गायब हुए, इनमें से 1443 बच्चे नहीं मिल पाए। गायब हुए बच्चो में 3059 यानी करीब 53 फीसदी लड़कियां थीं और  2709 लड़के थे। राजधानी में होने वाले कुल अपराधों का 12.36 फीसदी बच्चों के प्रति होने वाले अपराध हैं।
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