पीड़ित ने डिलीट किए सभी लिंक
एसआई विशाल यादव, हेडकांस्टेबल अमित और सुख लाल की टीम ने जांच के दौरान पाया कि ठगी के बाद पीड़ित ने व्हाट्सएप नंबर और धोखाधड़ी के लिंक को डिलीट कर दिया था। पुलिस टीम ने आरोपियों के लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया और डाटा रिकवर किया।
जिसके बाद मिले सबूतों के बाद पुलिस ने जयपुर और अजमेर में छापेमारी शुरू की। पुलिस ने जयपुर से आरोपी महेंद्र सिंह राजावत को गिरफ्तार किया। आरोपी ने शुरूआती पूछताछ में साइबर ठगी में अपनी भूमिका होने की बात को नकारा, लेकिन गहन पूछताछ और सबूतों के बाद उसने अपनी भूमिका कबूली और अपने साथियों आरिफ खान और लक्ष्मी नारायण वैश्य के बारे में जानकारी दी।
पुलिस ने छापेमार कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों के कई और साथियों की जानकारी मिली है। जिनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।
चीनी नागरिकों से कॉलिंग डिवाइस से सम्पर्क में थे आरोपी
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि तीनों आरोपी एक विशेष कॉलिंग डिवाइस के जरिए चीनी नागरिकों के सम्पर्क में थे। आरोपी ठगी के पैसों को यूएसडीटी में बदलकर चीनी नागरिकों को भेजते थे। इसके लिए महेन्द्र अपने साथी सर्वेश की मदद लेता था। सर्वेश अभी फरार है। आरोपियों ने बताया कि वह चीनी संचालकों को रकम हस्तांतरित करने के लिए बिनेंस जैसे प्लेटफार्म का उपयोग करते थे और इस प्रक्रिया में अपना कमीशन रखा करते थे।