दिल्ली हाईकोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले के सभी आरोपियों को बरी करने के खिलाफ सीबीआई और ईडी की अपील पर दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू कर दी है। इससे पहले पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई और ईडी की अपीलों पर दैनिक आधार पर सुनवाई करने का आदेश दिया था। इस मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा समेत कई लोग शामिल हैं।
न्यायमूर्ति बृजेश सेठी ने कहा कि आवेदन दायर करने में देरी और काफी ज्यादा दस्तावेज होने मात्र से आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करने से नहीं रुका जा सकता। अदालत ने दोनों जांच एजेंसियों की ओर से आरोपियों के बरी होने के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई की अनुमति दी और सोमवार से इन अपीलों पर सुनवाई शुरू कर दी गई।
इससे पहले अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में सीबीआई और ईडी की अपीलों पर पांच अक्तूबर से सुनवाई होगी। आगामी 30 नवंबर को सेवानिवृत होने जा रहे न्यायमूर्ति सेठी ने कहा कि यह न्याय के हित में है कि अदालत उनके रिटायर होने से पहले आंशिक तौर पर सुने जा चुके मामले की सुनवाई पूरी करने का प्रयास करे।
न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वह पहले सीबीआई मामले में सुनवाई करेंगे, जिसमें राजा और अन्य 16 को बरी किया जा चुका है। अदालत ने मामले में 24 अक्टूबर 2019 से 15 जनवरी 2020 तक सीबीआई को व्यापक रूप से सुना था और कोविड-19 महामारी के कारण मार्च से सुनवाई जारी नहीं रह पाई।
अदालत में तीन मामले लंबित हैं जिनमें से दो सीबीआई के और एक ईडी का है। अदालत ने हालांकि कहा कि यदि एजेंसियां दो से तीन महीने पहले इन याचिकाओं को लातीं तो याचिकाओं पर फैसला करना आसान हो जाता।
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने घोटाले से संबंधित सीबीआई और ईडी के मामलों में ए राजा, द्रमुक सांसद कनिमोझी और अन्य को 21 दिसंबर 2017 को बरी कर दिया था। विशेष अदालत ने 2जी घोटाला मामले की जांच में सामने आए एक अलग मामले में एस्सार समूह के प्रवर्तकों रविकांत रुइया और अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रवर्तकों आई पी खेतान तथा किरण खेतान और चार अन्य को भी बरी कर दिया था।
सीबीआई ने रविकांत रुइया, अंशुमान रुइया, आई पी खेतान और किरण खेतान और चार अन्य को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली अपील पर भी जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था।