प्रदेश में हर सरकार पक्की सड़के बनाने का दावा करती रही है, लेकिन इन दावों के बीच जौनियावास गांव से स्कूल तक बाईपास सड़क नहीं बन सकी है।
सड़क के लिए 1988 में जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन बीते 27 सालों में अब तक सड़क नहीं बनी है। जबकि गांव के पंच-सरपंच और लोग सड़क बनाने के लिए विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक इसकी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा अब भी शून्य है।
यहां यह बता देना ज्यादा दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल द्वारा गुडग़ांव में लगाए गए पहले खुले दरबार में भी यह शिकायत आई थी। उन्होंने विधायक और अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए थे कि इसका निर्माण किया जाए लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया।
1986 में स्कूल के लिए जमीन अधिग्रहण की थी। 1988 में सड़क बनाने के लिए जमीन मालिकों को मुआवजा दे दिया गया। इसके बाद से यहां पर पक्की सड़क बनाने की मांग की जा रही है।
सड़क का बजट लगभग 39 लाख
उम्मीद लगाए स्थानीय लोगों ने आजीज आकर 2008 में प्रदेश के तत्कालीन वित्त मंत्री विरेंद्र सिंह से शिकायत की। फिर 2012 में तत्कालीन मुख्य संसदीय सचिव प्रहलाद सिंह द्वारा लगाए जनता दरबार में शिकायत की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
2014 विधानसभा चुनाव के बाद इलाके के विधायक बिमला चौधरी से इसकी गुहार लगाई गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं आया। इसके बाद सरपंच गज सिंह द्वारा मुख्यमंत्री विंडो पर फरवरी 2015 में शिकायत की गई।
इसके बाद इस सड़क का 38.91 लाख का बजट तैयार कराया गया। इसके बाद लोगों की उम्मीद जगी थी कि शायद जल्द ही सड़क बन जाए, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।
इसके बाद दोबारा 29 जून 2015 शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इस समस्या को सीएम कार्यालय को भेज दिया गया, लेकिन अब तक सड़क के लिए तैयार बजट अब तक पास नहीं हुआ है।
जितने लोग उतनी दलीलें
सरपंच गज सिंह का कहना है कि सड़क का निर्माण होना तो दूर, अभी चंडीगढ़ से एस्टीमेट पास होकर नहीं आया है। पीडब्ल्यूडी महकमे ने अभी तक सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन का कब्जा भी नहीं लिया है।
अधिग्रहित जमीन पर भी पुराने मालिक अब कब्जा जमा रहे हैं। विधायक विमला चौधरी का कहना है कि मामला काफी पुराना है। कुछ पेचीदगी की वजह से फंसा हुआ है। जल्द ही इसका समाधान कराया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता धर्मवीर सिंह दहिया का कहना है कि इस सड़क के बारे में कोई भी प्रस्ताव विभाग के पास नहीं आया है और न ही बजट मिला है।