अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा रविवार को बलिदान दिवस मनाया गया। इसमें पिछले वर्ष आरक्षण आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और हवन कर आत्मा की शांति की प्रार्थना किया गया।
जाट समुदाय के लोगों ने जान गंवाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देने की मांग की। बलिदान दिवस को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहा। खुद उपायुक्त हरदीप सिंह खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। पल की घटना की जानकारी धरना स्थल के ड्यूटी मजिस्ट्रेट से लिया जा रहा था। छुट्टी के बावजूद अतिरिक्त उपायुक्त व सीटीएम दफ्तर में मौजूद रहे।
सुबह से ही लोग जुटना शुरू हो गए थे। दिन बढने के साथ भीड़ आने लगी थी, लेकिन जितनी उम्मीद थी, उस हिसाब से यहां भीड़ नहीं जुटी। इसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट दिखा।
हवन कर बलिदान दिवस कार्यक्रम की शुरुआत की गई
jat andolan
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस बल पूरी तैयारी के साथ दौलताबाद के पास मौजूद थे। दोपहर में हवन कर बलिदान दिवस कार्यक्रम की शुरुआत की गई और पिछले वर्ष हुए आंदोलन में जान गंवाने वाले जाट समुदाय के लोगों को याद कर श्रद्धांजलि दी गई।
इसके बाद जाट समुदाय के लोगों को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आलाकमान द्वारा लिए निर्णय के बारे में बताया गया। जाट समुदाय के लोगों का आरोप है कि सरकार आंदोलन को कुचलने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन यह धरना खत्म नहीं होगा।
बलिदान दिवस में बीते सप्ताह हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की रणनीति के बारे में लोगों को बताया गया है। इसमें 26 फरवरी को पूरे हरियाणा में काला दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है।
jat andolan
- फोटो : अमर उजाला
जाट नेता ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे जाट मंत्री और नेता ही इस आंदोलन को तोडने का प्रयास कर रहे हैं। जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करेगी, धरना अनिश्चितकालीन के लिए जारी रहेगा।
समिति के हरियाणा प्रभारी रणजीत सिंह सेहरावत का कहना है कि 36 बिरादरी के लोग यहां पहुंचे हैं। पिछले साल आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि उनका बलिदान खाली नहीं जाएगा तथा पूरा समाज सरकार को उनकी मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर कर देगा।
आज हर घर से महिला और पुरुष यहां धरना स्थल पर श्रद्धांजलि देने के लिए आए हैं। उससे साफ है कि पूरा समाज इस लड़ाई में उनके साथ है। जब तक सरकार मांगे नहीं मान लेती है, तब तक धरना जारी रहेगा। सरकार ने हमेशा धोखा दिया है, अब उनके बहकावे या मान मनौव्वल पर नहीं आएंगे। अब ठोस निर्णय चाहिए।