दिल्ली के निजी स्कूलों ने छठे वेतन आयोग की आड़ में फीस बढ़ाकर करोड़ों रुपये छात्रों से वसूले, लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद अभिभावकों को फीस वापस नहीं कर रहे। शिक्षा निदेशालय द्वारा 242 स्कूलों को नोटिस देने के बाद एक भी स्कूल ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने स्कूलों के खातों की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति अनिल देव कमेटी द्वारा पेश चार रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद इन स्कूलों को फीस वापस करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने मई में दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालय को आदेश दिया था कि वह कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 242 स्कूलों को नोटिस जारी कर छात्रों से वसूली गई राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित वापस दिलवाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
शुरू में तो निदेशालय ने गंभीरता नहीं दिखाई, लेकिन अदालत की फटकार के बाद स्कूलों को नोटिस जारी कर उन्हें अभिभावकों को फीस वापस कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अभी तक एक भी स्कूल ने नहीं बताया कि फीस वापस करने की दिशा में क्या किया गया है। इस मामले में अब हाईकोर्ट में 28 अक्तूबर सुनवाई होगी।
फीस वापसी की श्रेणी में 121 और स्कूल बढ़े
चौथी रिपोर्ट के बाद 242 स्कूलों का मामला अभी निपटा भी नहीं है कि न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह कमेटी ने हाईकोर्ट को सौंपी अपनी पांचवीं रिपोर्ट में 80 स्कूलों व छठी रिपोर्ट में 41 स्कूलों को भी अधिक फीस वसूलने का दोषी ठहराया है। यानी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 121 अन्य निजी स्कूलों पर फीस वापसी की तलवार लटक गई है।
1172 में अब तक 836 स्कूलों के खातों की जांच
न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह की अघ्यक्षता वाली कमेटी ने कहा है राजधानी के निजी स्कूलों में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। कमेटी को कुल 1172 निजी स्कूलों के खातों की जांच करनी है।
कमेटी अब तक 836 स्कूलों के खातों की जांच कर पेश छह रिपोर्ट में कुल 363 स्कूलों को दोषी ठहरा चुकी है। इसके अलावा कमेटी को अभी भी 336 स्कूलों की जांच करनी है। 233 से ज्यादा ऐसे स्कूल पाए गए जिन्होंने फर्जी दस्तावेज के आधार पर खाते बनाए हैं।
रिपोर्ट में क्या कहा है कमेटी ने
न्यायमूर्ति अनिल देव ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सभी स्कूलों ने छठे वेतन आयोग की सिफारिश को लागू करने के लिए बच्चों से एक जनवरी 2006 से अगस्त 2008 तक बकाया राशि फीस के रूप में वसूली।
यानी कुल 32 माह की फीस बढ़ी हुई दर से वसूली। यह राशि टीचरों को वेतन के रूप में देनी थी, मगर स्कूल प्रशासन इस राशि को स्वयं डकार गया। कमेटी ने कहा कि स्कूलों ने फीस तो अधिक वसूल ली, मगर 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार टीचरों को वेतन नहीं दिया।