पहली बार किसी को वोट न देने के विकल्प के रूप में सामने आया नोटा (नन ऑफ द एबव) फरीदाबाद के 22 प्रत्याशियों पर भारी पड़ा। मतलब यह कि इस बटन को दबाकर शहर के लोगों ने नेताओं के प्रति जबरदस्त गुस्से का इजहार किया।
लोगों
को यह बात पच नहीं रही है लेकिन यह कड़वी सच्चाई है। शहर के 3328 लोगों ने
इसका प्रयोग किया। समाजवादी पार्टी एवं जनता दल युनाइटेड जैसी पार्टियां
भी नोटा के नीचे दबी रहीं।
श्रमिक नेता बेचू गिरी का कहना है कि
भ्रष्टाचार और महंगाई का गुस्सा न सिर्फ लोगों ने भाजपा को भारी वोट देकर
निकाला बल्कि नोटा पर बटन दबाकर भी नाराजगी जताई।