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दिल्ली एम्स के अधीन आएंगे देशभर के 22 एम्स, मास्टर प्लान के पुनर्विकास को मंजूरी

Sat, 02 Mar 2019 03:07 AM IST
Priyesh Mishra परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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एम्स दिल्ली
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केंद्र सरकार ने दिल्ली एम्स के मास्टर प्लान के पुनर्विकास को मंजूरी दे दी है। साथ ही इसे विश्व स्तर का विश्वविद्यालय बनाने का लक्ष्य भी रखा है। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये खर्च भी किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, मास्टर प्लान के पुनर्विकास के तहत चिकित्सीय शिक्षा और उपचार के लिए सुविधाएं देना शामिल हैं।
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इमारत बनने और यहां तकनीक स्थापित होने के बाद एम्स को विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हो सकेगा, जिसके अधीन देशभर के 22 एम्स होंगे। इन एम्स में नीतियां, उपचार और चिकित्सीय शिक्षा को लेकर हर छोटे-बड़े फैसले विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने के बाद दिल्ली एम्स ले सकेगा।

ये है एम्स का मास्टर प्लान
दरअसल दिल्ली एम्स अभी ईस्ट किदवई नगर, अंसारी नगर और मस्जिद मोठ इलाके में फैला है। मरीजों की सहूलियत और भीड़ को ध्यान में रखते हुए अंसारी नगर और मस्जिद मोठ क्षेत्र को इलाज व शैक्षिक गतिविधियों के लिए रखा है, जबकि एम्स ट्रॉमा सेंटर के पास 30 एकड़ भूमि को आवासीय सुविधाओं के लिए निश्चित किया है। 
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2021 तक शुरू होंगी ज्यादातर सुविधाएं
केंद्र सरकार ने एम्स के जिस मास्टर प्लान को मंजूरी दी है। दरअसल उसके तहत कई तरह के ब्लॉक एम्स में तैयार किए जा रहे हैं। इसमें 200 बिस्तरों का सर्जिकल ब्लॉक, विश्राम सदन, 570 कमरों वाला न्यू ओपीडी ब्लॉक, 425 बिस्तरों वाला मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक, 113 कमरों का प्राइवेट वार्ड और बर्न एवं प्लास्टिक ब्लॉक 100 बिस्तरों के साथ लगभग बनकर तैयार है।

वहीं जीरिएट्रिक ब्लॉक 200 बेड के साथ तैयार हो रहा है। साल 2021 तक ये सभी ब्लॉक शुरू हो जाएंगे। इसके अलावा वीवीआईपी वार्ड, कैंटीन, न्यू इमरजेंसी ब्लॉक, टीचिंग ब्लॉक, सर्विसेज ब्लॉक, कन्वर्जेंस ब्लॉक, अंडरग्राउंड पार्किंग और जांच के लिए अलग से एक ब्लॉक तैयार किया जा रहा है। 

ये सेंटर भी होंगे दिल्ली एम्स में

मास्टर प्लान के तहत दिल्ली एम्स में नेशनल ट्रांसप्लांटेशन सेंटर (500 बेड), नेशनल सेंटर फॉर चाइल्ड हेल्थ (500 बेड), पाचन तंत्र से जुड़े रोगों के लिए सेंटर (500 बेड), ब्लड डिस्ऑर्डर सेंटर 120 बिस्तरों के साथ तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा सेंटर फॉर लेबोरेट्री मेडिसिन और नेशनल सेंटर फॉर नर्सिंग एजुकेशन एंड रिसर्च भी इसमें शामिल है। इन सब में करीब 3 हजार करोड़ रुपये का बजट भी रखा है। 

संक्रमण और पब्लिक हेल्थ का सेंटर भी होगा
सूत्रों का कहना है कि एम्स के मस्जिद मोठ इलाके में संक्रमण और पब्लिक हेल्थ को लेकर प्रस्तावित सेंटरों की स्थापना भी आने वाले दिनों में होगी। इसके अलावा 2400 करोड़ की लागत से 600 बेड वाला नेशनल कार्डियो वास्कुलर सेंटर भी स्थापित होगा। ये सेंटर लंबे समय से पाइपलाइन में पड़ा हुआ है। इसके अलावा 17 रिसर्च सेंटर और 10 विशेष बीमारियों के सेंटर भी दिल्ली एम्स में स्थापित किए जा रहे हैं।
 
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बेहतर होगी चिकित्सीय शिक्षा, मरीजों को फायदा



एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि देश के लिए एक आदर्श चिकित्सीय संस्थान बनाने के लिए दिल्ली एम्स का मास्टर प्लान तैयार किया था। इसे सरकार से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही करोड़ों लोगों को फायदा होगा। मरीजों को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। उपचार के लिए एक से दूसरी इमारत में भटकना नहीं पड़ेगा। एम्स अभी भी विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस है। ऑटोनॉमस होने के कारण ये एक विश्वविद्यालय की भांति ही काम करता है। हालांकि देशभर के सभी एम्स को लीड करते हुए इसे विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त होने से चिकित्सीय शिक्षा बेहतर होगी।
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