केंद्र सरकार ने दिल्ली एम्स के मास्टर प्लान के पुनर्विकास को मंजूरी दे दी है। साथ ही इसे विश्व स्तर का विश्वविद्यालय बनाने का लक्ष्य भी रखा है। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये खर्च भी किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, मास्टर प्लान के पुनर्विकास के तहत चिकित्सीय शिक्षा और उपचार के लिए सुविधाएं देना शामिल हैं।
इमारत बनने और यहां तकनीक स्थापित होने के बाद एम्स को विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हो सकेगा, जिसके अधीन देशभर के 22 एम्स होंगे। इन एम्स में नीतियां, उपचार और चिकित्सीय शिक्षा को लेकर हर छोटे-बड़े फैसले विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने के बाद दिल्ली एम्स ले सकेगा।
ये है एम्स का मास्टर प्लान
दरअसल दिल्ली एम्स अभी ईस्ट किदवई नगर, अंसारी नगर और मस्जिद मोठ इलाके में फैला है। मरीजों की सहूलियत और भीड़ को ध्यान में रखते हुए अंसारी नगर और मस्जिद मोठ क्षेत्र को इलाज व शैक्षिक गतिविधियों के लिए रखा है, जबकि एम्स ट्रॉमा सेंटर के पास 30 एकड़ भूमि को आवासीय सुविधाओं के लिए निश्चित किया है।
2021 तक शुरू होंगी ज्यादातर सुविधाएं
केंद्र सरकार ने एम्स के जिस मास्टर प्लान को मंजूरी दी है। दरअसल उसके तहत कई तरह के ब्लॉक एम्स में तैयार किए जा रहे हैं। इसमें 200 बिस्तरों का सर्जिकल ब्लॉक, विश्राम सदन, 570 कमरों वाला न्यू ओपीडी ब्लॉक, 425 बिस्तरों वाला मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक, 113 कमरों का प्राइवेट वार्ड और बर्न एवं प्लास्टिक ब्लॉक 100 बिस्तरों के साथ लगभग बनकर तैयार है।
वहीं जीरिएट्रिक ब्लॉक 200 बेड के साथ तैयार हो रहा है। साल 2021 तक ये सभी ब्लॉक शुरू हो जाएंगे। इसके अलावा वीवीआईपी वार्ड, कैंटीन, न्यू इमरजेंसी ब्लॉक, टीचिंग ब्लॉक, सर्विसेज ब्लॉक, कन्वर्जेंस ब्लॉक, अंडरग्राउंड पार्किंग और जांच के लिए अलग से एक ब्लॉक तैयार किया जा रहा है।