7:00 बजे 1.55 लाख क्यूसेक
8:00 बजे 2.57 लाख क्यूसेक
9:00 बजे 3.25 लाख क्यूसेक
10:00 बजे 4.30 लाख क्यूसेक
11:00 बजे 5.10 लाख क्यूसेक
12:00 बजे 5.25 लाख क्यूसेक
5:00 बजे 8.14 लाख क्यूसेक
6:00 बजे 8.27 लाख क्यूसेक
समय यमुना का जलस्तर
सुबह 6 बजे 203.34
सुबह 9 बजे 203.37
दोपहर 12 बजे 203.37
शाम 6 बजे 203.37
शाम 7 बजे 203.37
उत्तराखंड के छह जिलों में अगले 24 घंटे भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी
उत्तराखंड में मौसम विभाग ने प्रदेश के छह जिलों में अगले 24 घंटे भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की वजह से नुकसान भी हो सकता है। बता दें, शनिवार की रात से ही देहरादून सहित प्रदेशभर में बारिश हो रही है। रातभर बारिश के बाद रविवार को भी सुबह से शाम तक बारिश होती रही। इसकी वजह से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने सोमवार सुबह से अगले 24 घंटे तक देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, नैनीताल और पौड़ी जिले में भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
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नेशनल हाईवे के साथ एक दर्जन मार्ग बंद
शनिवार रात से हो रही बारिश के कारण सड़कों पर मलबा आने का क्रम भी जारी है। नेशनल हाईवे 72-बी भी कई जगह पहाड़ों से मलबा आने से बंद हो गया। यहां पर जेसीबी और पीडब्ल्यूडी की टीमों में दिनभर मलबा हटाने का काम किया और करीब 11 बजे बंद हुआ हाईवे दोपहर तीन बजे सुचारु हो सका।
कहीं फंसे हों तो डायल करें ये नंबर
1077- आपदा कंट्रोल रूम
112- पुलिस
108- एंबुलेंस
0135-2652571- नगर निगम आपदा कंट्रोल रूम
हिमाचल में रेड अलर्ट के बीच शनिवार रात और रविवार दोपहर तक बारिश-भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। प्रदेश में एक पर्यटक, मां-बेटियों और दादा- पोती समेत 21 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो लोग बह गए। दर्जनों लोग घायल हो गए हैं।
शिमला में नौ लोगों, सोलन में पांच, चंबा में तीन, कुल्लू में दो और बिलासपुर-सिरमौर जिलों में 1-1 की व्यक्ति की जान गई है। प्रदेश में नौ नेशनल हाईवे समेत 887 से ज्यादा सड़कें बाधित रहीं। कालका-शिमला और पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल ट्रैक मलबा और पेड़ गिरने से ठप रहे।
प्रदेश के तीनों एयरपोर्ट गगल, भुंतर और शिमला में हवाई उड़ानें प्रभावित रहीं। प्रदेश में हाईवे समेत सैकड़ों सड़कें कई मीटर तक बह गईं। दर्जनों पुल क्षतिग्रस्त हो गए। कुल्लू-मनाली, लाहौल और किन्नौर में हजारों देसी-विदेशी सैलानी और बौद्ध भिक्षु फंस गए हैं। बारिश से 100 के करीब घर और गोशालाएं जमींदोज हो गई हैं। इस सीजन में अब तक करीब 190 लोगों की मौत हो चुकी है।