पीठ ने कहा कि अगर प्रत्यर्पण अवैध है तो उसके खिलाफ यहां मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा याचिका विचारणीय नहीं है क्योंकि बंदी प्रत्यक्षीकरण सजा के आदेश के खिलाफ नहीं है। पीठ ने वकील से कहा जब तक आपकी सजा को खारिज नहीं किया जाता क्या हम कह सकते हैं कि आपकी नजरबंदी अवैध है? आप याचिका वापस ले सकते हैं।
सलेम के वकील ने कहा कि उनके पास याचिका वापस लेने का कोई निर्देश नहीं है और इस संबंध में निर्देश लेने के लिए समय मांगा है क्योंकि याचिकाकर्ता अबू सलेम मुंबई की तलोजा जेल में बंद है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि एक बार जब अदालत ने अबू सलेम को दोषी ठहराया तो वह यह नहीं कह सकता कि हिरासत अवैध है। पीठ ने भले ही शुरूआत में उसकी नजरबंदी कानून में उचित नहीं थी, फिर भी अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद हिरासत अवैध नहीं रहती है।
गैंगस्टर/अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने बंदी प्रत्कीयक्षीकरण याचिका में अपनी हिरासत को अवैध घोषित करने और रिहा करने और पुर्तगाल वापस भेजने के लिए उचित दिशा देने की मांग की गई है । सलेम ने तर्क दिया कि भारतीय अधिकारियों ने प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन किया है। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के आरोपी सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था।