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हाईकोर्ट ने कहा: अबू सलेम के प्रत्यर्पण को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं, वापस लें वरना खारिज कर देंगे

Mon, 14 Mar 2022 10:35 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

1993 के मुंबई बम धमाकों में दोषी ठहराए जाने के बाद गैंगस्टर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है, जिसमें 257 लोग मारे गए थे और 713 लोग घायल हुए थे।उसे दिल्ली की एक अदालत ने 2002 के रंगदारी मामले में सात साल के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई है।
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अबू सलेम - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि गैंगस्टर अबू सलेम की भारतीय अधिकारियों द्वारा उसके प्रत्यर्पण को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता को एक सक्षम अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत ने उनके वकील को याचिका वापस लेने का निर्देश लेने के लिए समय प्रदान कर दिया है। 

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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति एके मेंदीरत्ता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनका मानना है कि यह याचिका विचारणीय नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या वह याचिका वापस लेंगे या वे इसे खारिज कर दें। इसके बाद अधिवक्ता एस हरिहरन ने याचिका वापस लेने के निर्देश लेने के लिए समय मांगा। अदालत ने याचिका पर सुनवाई मई तक के लिए स्थगित कर दी।

याची के वकील ने अपने मुवक्किल से विचार करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगते हुए कहा कि एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को चुनौती दी गई है। उन्होंने प्रत्यापर्ण संधि के अनुसार याचिकाकर्ता को 25 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए सजा नहीं दी जा सकती, लेकिन उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई  है जो संधि का उल्लंघन है।

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पीठ ने कहा कि अगर प्रत्यर्पण अवैध है तो उसके खिलाफ यहां मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा याचिका विचारणीय नहीं है क्योंकि बंदी प्रत्यक्षीकरण सजा के आदेश के खिलाफ नहीं है। पीठ ने वकील से कहा जब तक आपकी सजा को खारिज नहीं किया जाता क्या हम कह सकते हैं कि आपकी नजरबंदी अवैध है? आप याचिका वापस ले सकते हैं।

 

सलेम के वकील ने कहा कि उनके पास याचिका वापस लेने का कोई निर्देश नहीं है और इस संबंध में निर्देश लेने के लिए समय मांगा है क्योंकि याचिकाकर्ता अबू सलेम मुंबई की तलोजा जेल में बंद है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि एक बार जब अदालत ने अबू सलेम को दोषी ठहराया तो वह यह नहीं कह सकता कि हिरासत अवैध है। पीठ ने भले ही शुरूआत में उसकी नजरबंदी कानून में उचित नहीं थी, फिर भी अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद हिरासत अवैध नहीं रहती है।

 
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गैंगस्टर/अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने बंदी प्रत्कीयक्षीकरण याचिका में अपनी हिरासत को अवैध घोषित करने और रिहा करने और पुर्तगाल वापस भेजने  के लिए उचित दिशा देने की मांग की गई है । सलेम ने तर्क दिया कि भारतीय अधिकारियों ने प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन किया है। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के आरोपी सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था।
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