केंद्र के इस तर्क पर अदालत ने केंद्र को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि पूरे मस्जिद परिसर को क्यों नहीं खोला जा सकता। नायर ने कहा था कि लगभग 2,000 विदेशी नागरिकों के तब्लीगी गतिविधि में लिप्त पाए जाने के बाद परिसर को बंद कर दिया गया था जो कि वीजा नियमावली के तहत प्रतिबंधित गतिविधि है। अदालत ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि घटना प्रासंगिक नहीं है क्योंकि वक्फ बोर्ड द्वारा अनुमति मांगी जा रही है। ये लोग विदेशी नागरिक नहीं। आपने जो कुछ भी दिखाया है वह विदेशी नागरिकों के संबंध में है। यह वे विदेशी नागरिक नहीं हैं जो यहां प्रार्थना करना चाहते हैं।
वहीं प्रबंध समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने बताया कि आज तक सदस्यों के खिलाफ कोई आरोप पत्र दायर नहीं किया गया है और एक भी मामला नहीं है। उन्होंने कहा पुलिस व अन्य ने किस प्रावधान के तहत चाबियां छीन लीं? कोई जब्ती ज्ञापन भी नहीं है। हमें बस परिसर से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे कोविड-19 प्रोटोकॉल के संबंध में किसी भी शर्त का पालन करने के लिए तैयार हैं।