विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत ने आठ नवंबर को कुमार के खिलाफ एक मामले में अंतिम दलीलें सुनीं थीं। यह मामला एक नवंबर, 1984 को सरस्वती विहार इलाके में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से संबंधित है।
अदालत ने शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में फैसला 16 दिसंबर तक के लिए टाल दिया। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत ने आठ नवंबर को कुमार के खिलाफ एक मामले में अंतिम दलीलें सुनीं थीं। यह मामला एक नवंबर, 1984 को सरस्वती विहार इलाके में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से संबंधित है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने 1984 के दिल्ली कैंट इलाके के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि उच्च न्यायालय ने दंगों को मानवता के खिलाफ अपराध कहा था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि नरसंहार का उद्देश्य हमेशा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि वर्तमान मामला कोई अलग-थलग मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े नरसंहार का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1984 में दिल्ली में 2,700 सिख मारे गए थे और यह कोई सामान्य स्थिति नहीं थी। एक नवंबर, 2023 को अदालत ने सज्जन कुमार का बयान दर्ज किया।
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उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कुमार भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे और उनके उकसावे पर भीड़ ने दो लोगों को जिंदा जला दिया और उनके घर और अन्य संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। उनके घर को जला दिया और उनके घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को गंभीर चोटें पहुंचाईं।