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Delhi: दिल्ली की बिजली व्यवस्था मजबूत करने पर खर्चेंगे 17 हजार करोड़, सीएम ने पेश किया बिजली वितरण का रोडमैप

Thu, 01 Jan 2026 03:50 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

मुख्यमंत्री ने कहा है कि विकसित, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल दिल्ली के लिए मजबूत बिजली व्यवस्था बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत दिल्ली सरकार ने ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया है।
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सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : X/BJP
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विस्तार
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दिल्ली की तेजी से बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए सरकार ने बड़ा और दूरगामी रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि अगले तीन साल में दिल्ली की बिजली व्यवस्था को ज्यादा भरोसेमंद, सुरक्षित और भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए करीब 17 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का फोकस ऐसा बिजली तंत्र तैयार करने पर है, जिससे गर्मी के पीक सीजन में भी लोगों को बिना कटौती, बिना फॉल्ट और बेहतर गुणवत्ता की बिजली मिल सके।

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मुख्यमंत्री ने कहा है कि विकसित, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल दिल्ली के लिए मजबूत बिजली व्यवस्था बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत दिल्ली सरकार ने ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बुधवार की बैठक में साल 2029 तक की बिजली कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बिजली मंत्री आशीष सूद, बिजली विभाग के तमाम अधिकारी, दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) और सभी डिस्कॉम के प्रतिनिधि मौजूद रहे। तीन साल में करीब 17,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना लागू की जाएगी। इस राशि से नई ट्रांसमिशन लाइनें, ग्रिड सब स्टेशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश सिर्फ क्षमता बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि हर इलाके में निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित करने के लिए होगी।

दिल्ली में हर साल तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग
साल 2025 में राजधानी की अधिकतम बिजली मांग करीब 8,400 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। औसतन हर साल मांग 4 से 5 फीसदी बढ़ रही है। इसके पीछे बढ़ती आबादी, एसी और अन्य बिजली उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ना प्रमुख कारण हैं। अधिकारियों ने बताया कि अगर यही रुझान जारी रहा तो साल 2030 तक दिल्ली की पीक डिमांड 11,500 से 12,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि 2040 तक यह 19,000 से 20,000 मेगावाट के स्तर पर जा सकती है।
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बढ़ती मांग को चुनौती नहीं बल्कि अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस बढ़ती मांग को चुनौती नहीं बल्कि अवसर मान रही है। अभी से तैयारी कर ली जाए, ताकि आने वाले वर्षों में दिल्ली को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक भी राजधानी में बिजली आपूर्ति पर कोई दबाव न आए। बैठक में सौर ऊर्जा को लेकर भी अहम फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ओब तेजी से लागू होगी। सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जाएंगे। सौर ऊर्जा को सरकार स्वच्छ ऊर्जा की रीढ़ बनाएगी। कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया सरल होगी। इसके अलावा, अनुपयोगी या कम इस्तेमाल वाली जमीन को भी इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने डिस्कॉम को फ्लाईओवरों के नीचे और अन्य उपयुक्त स्थानों पर बिजली वितरण से जुड़ी संरचनाएं स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटेगी।

सबसे एडवांस तकनीक दिल्ली में लागू होगी - सीएम
मुख्यमंत्री ने डीटीएल और डिस्कॉम को निर्देश दिए कि फॉल्ट की स्थिति में बिजली बहाली और तेज की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को न्यूनतम परेशानी हो। अंतिम छोर तक बिजली आपूर्ति और गुणवत्ता सुधरे। विधानसभा क्षेत्रों में वितरण ढांचा सुधारा जाए। सीएम ने कहा, दिल्ली सरकार का लक्ष्य सिर्फ आज की जरूरतें पूरी करना नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए एक भरोसेमंद, टिकाऊ और उपभोक्ता केंद्रित बिजली व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने सभी एजेंसियों से आपसी सहयोग मजबूत करने, दुनिया की सबसे एडवांस तकनीक को अपनाने और सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

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