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Delhi NCR News: पुराने मामलों के निपटारे के लिए दिल्ली पीडब्ल्यूडी ने सीपीडब्ल्यूडी पैनल का लेगा सहारा

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-विभाग लंबित पुराने मध्यस्थता मामलों के निपटारे के लिए सीपीडब्ल्यूडी के पैनल में शामिल मध्यस्थों को अपनाने का किया फैसला
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने लंबित पड़े पुराने मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) मामलों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार के केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के पैनल में शामिल मध्यस्थों को अपनाने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय केवल पुराने अनुबंधों पर लागू होगा, जिनमें अब भी सामान्य अनुबंध शर्तों की धारा-25 प्रभावी है।
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दरअसल, दिल्ली पीडब्ल्यूडी ने जून 2025 से नए ठेकों में मध्यस्थता की शर्त को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब विभाग और निजी ठेकेदारों के बीच किसी भी विवाद की स्थिति में मामला सीधे अदालत में जाएगा। विभाग का कहना है कि मध्यस्थता के जरिये हुए कई फैसलों के कारण सरकार को बीते वर्षों में भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। अधिकारी ने बताया कि नियमों में बदलाव नए ठेकों के लिए हैं, लेकिन पुराने अनुबंधों में पहले से मध्यस्थता की प्रक्रिया जारी है। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए अनुभवी मध्यस्थों की जरूरत को देखते हुए सीपीडब्ल्यूडी के पैनल को अपनाने का आदेश जारी किया है। विभाग के आदेश में कहा कि यह पैनल 17 मार्च 2023 को गठित पीडब्ल्यूडी के मौजूदा मध्यस्थ पैनल के अतिरिक्त रहेगा और अगले आदेश तक लागू रहेगा। इस पैनल में ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल है, जिन्होंने इंजीनियरिंग से जुड़े वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है और जिनकी आयु 70 वर्ष से कम है। पीडब्ल्यूडी के सामने लंबित कई विवाद परियोजनाओं में देरी से जुड़े हैं। देरी के चलते निर्माण लागत बढ़ जाती है और ठेकेदार अतिरिक्त भुगतान की मांग करते हैं, जिससे सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ता है। इसी तरह का एक मामला बारापूला फेज-तीन एलीवेटेड कॉरिडोर से भी जुड़ा है, जिसमें मध्यस्थता के फैसले में ठेकेदार के पक्ष में करीब 120 करोड़ रुपये का भुगतान तय हुआ। इस मामले में अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए सरकार ने सतर्कता जांच के आदेश भी दिए हैं।
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