दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि आग से संबंधित सर्वाधिक कॉल गर्मियों के मौसम में अप्रैल से जून के बीच प्राप्त हुईं। सर्दियों में ऐसी घटनाएं कम हुईं। आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से 2020 के दौरान आग लगने की 17,231 कॉल आईं थी। इनमें 100 लोगों की जान गई जबकि 843 घायल हुए। 2020 और 2021 के बीच आग से संबंधित 15,158 कॉलें आईं जबकि 2021-2022 में 14,268 कॉल प्राप्त हुईं। इनमें 55 कॉल घातक जबकि 392 कम नुकसान से संबंधित थी।
2022 के अप्रैल में आग की सर्वाधिक 3,139 घटनाएं हुईं। मई में 2,234 और जून में 2192 घटनाएं हुईं। पिछले साल मार्च में पूर्वोत्तर दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में सुबह तड़के झुग्गियों में आग लगने से सात लोगों की मौत हो गई थी। प्रभावित हुई कुल 60 झोपड़ियों में से 30 झोपड़ियां पूरी तरह जल गई थी। पिछले साल 14 मई को बाहरी दिल्ली के मुंडका में एक चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 12 घायल हुए थे।
आग फैक्ट्री की पहली मंजिल से लगी थी जिसमें सीसीटीवी कैमरों और राउटर तैयार किए जा रहे थे। आग बुझाने के लिए 30 से अधिक दमकल गाड़ियों को लगाया गया जबकि जले हुए शवों की पहचान के लिए पुलिस को डीएनए प्रोफाइलिंग का सहारा लेना पड़ा। अक्टूबर 2022 में पूर्वी दिल्ली के गांधी मार्केट में एक बड़ी आग लगने के बाद एक दुकान की दूसरी मंजिल से एक 19 वर्षीय व्यक्ति का जला हुआ शव बरामद किया गया था। दिसंबर में पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर में एक बहुमंजिला पार्किंग में खड़ी 20 कारें आग में जल गईं।