अस्पतालों का ब्रेकडाउन पावर कारपोरेशन अफसरों के जी का जंजाल बन गया है। आला अफसरों के तेवर से लगता है कि इस मामले में एक-दो स्थानीय अफसरों पर गाज गिर सकती है।
महिला और जिला अस्पतालों की बिजली 16 घंटे तक गायब रहने और 12 घंटे तक अफसरों को इसकी जानकारी न होने को गंभीर माना जा रहा है।
हैरत की बात यह है कि सप्लाई ट्रिप होने के 12 घंटे तक कारपोरेशन अफसरों को ब्रेक डाउन की जानकारी नहीं थी। यही कारण रहा कि सप्लाई ओके करने में 16 घंटे का समय लगा।
अफसरों की नींद तब खुली जब अस्पतालों में मरीज बेहाल होने शुरू हो गए। अब यह मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। एमडी यूपीपीसीएल ने इसको गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट तलब की है।
एक्सईएन अजय अग्रवाल का कहना था कि गलती एसडीओ स्तर पर हुई है। एसडीओ को ब्रेक डाउन की जानकारी देनी चाहिए थी। उसका जवाब तलब किया गया है।
ये है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट की रुलिंग है कि अस्पतालों की बिजली नहीं कटेगी। इसके लिए पावर कारपोरेशन ने अस्पतालों के लिए अलग से फीडर बनाए हुए हैं। इसके अलावा अस्पताल सप्लाई को एक दूसरे फीडर की पहुंच में रखा जाता है, जिससे इमरजेंसी में वहां से सप्लाई दी जा सके। हुआ भी यही, रात एक बजे से गायब बिजली की जानकारी जैसे ही दोपहर दो बजे उच्चाधिकारियों को मिली, 15 मिनट में दूसरी लाइन से आपूर्ति दी गई। यदि अफसर सजग रहते तो अस्पतालों को इतना लंबा कट नहीं झेलना पड़ता।