कांग्रेस देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 125वां जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाने जा रही है। इसकी तैयारी का जिम्मा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खासतौर पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को सौंपा है। दरअसल, केरल के उपराज्यपाल के पद से इस्तीफा देकर दिल्ली वापसी कर चुकी शीला दीक्षित की राजनीति में भी वापसी के कयास लगाए जा रहे थे।
दिल्ली में चल रहे माहौल को देखते हुए इसकी चर्चा भी तेज हो गई थी, पार्टी का भी मानना था कि अभी दिल्ली में शीला की साख है। पर शीला दीक्षित ने वापसी से मना कर दिया था। साथ ही यह साफ कर दिया था कि अब वे राजनीति की मुख्य धारा में वापस नहीं लौटेंगी।
इस बात का ध्यान रखते हुए सोनिया गांधी ने शीला दीक्षित को यह विशेष काम सौंपा। चूंकि अब 14 नवंबर बहुत दूर नहीं है, इसलिए शीला दीक्षित पूरे जोर-शोर से लग गई हैं। लेकिन क्या पार्टी इस बार भी उसी धब्बे को लेकर जन्मोत्सव मनाना चाहेगी। दरअसल, पंडित नेहरू की जन्मस्थली को लेकर तरह-तरह विवाद हैं। उसकी सूचना सोनिया गांधी को भी है, क्या पार्टी इस बार उस धब्बे को धोना चाहेगी।
आनंद भवन में है प्रमाण
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जन्मस्थली पर इन दिनों जिस्मफरोशी का कारोबार चला रहा है। इस बारे में स्थानीय लोगों ने यूपीए सरकार के दौरान ही अधिकृत जानकारी मांगी थी। ताकि उस वहां से वेश्यावृति को हटवाया जा सके। लेकिन अभी तक किसी तरह की कोई जानकार हासिल नहीं कराई गई।
इलाहाबाद स्थित पंडित मोतीलाल नेहरू के घर आनंद भवन में उपलब्ध जानकारी के अनुसार पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को मीरगंज के मकान नंबर 77 में हुआ था। यह इलाहाबाद का चर्चित रेड लाइट एरिया है।
आनंद भवन में उस तीन मंजिले का एक मॉडल भी रखा हुआ है, जिसपर लिखा है 'पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म मीरगंज के इसी घर में हुआ था। बाद में इसे गिरा दिया गया था।'
नेहरू के जन्मस्थल पर वेश्याओं का कब्जा
स्थानीय लोग बताते हैं कि पंडित नेहरू के जन्म के समय भी मीरगंज में वेश्यावृति होती थी। इसी वजह से नेहरू के जन्म के कुछ सालों बाद उनका परिवार इलाहाबाद के सिविल लाइंस स्थित 9 एल्गिन रोड पर किराये पर रहने चला गया था।
उसके बाद वेश्याओं ने उस घर में भी वेश्यावृति करनी चाही, तो पंडित मोतीलाल नेहरू की शिकायत पर नगर निगम ने उस इमारत को गिरा दिया। मकान के गिराए जाने के बाद मीरगंज की वेश्याओं ने फिर से उस जगह पर कब्जा कर लिया और वहां आज भी वेश्यावृति होती है।
नगर निगम इलाहाबाद के आंकड़ों के मुताबिक यह मकान अब्दुल हमीद का है। वहीं स्थित एक अन्य मुतवल्ली के मुताबिक मकान मालिक भी वेश्यावृति में संलिप्त है। समय-समय पर स्थानीय व्यापारी वेश्यावृति हटाने के लिए धरना, जुलूस आदि निकालते रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।