पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके में अपने एक कमरे के घर में रहने वाली 12 साल की सुमन शाम के वक्त छत पर टहलने गई। उसे क्या पता था कि शाम को घर से निकलना उसे इतना महंगा पड़ेगा।
अचानक उसने कुछ लोगों के झगड़ने और शोर की आवाज सुनी। उसने देखा कि कॉलोनी के कुछ लोग उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन, अचानक झगड़ा उग्र हो गया और बंदूकें निकल गईं।
सुमन के परिवार वालों का कहना है कि उत्पात करने वाले लोग मोहल्ले के ही एक होटल में शराब पी रहे थे और उस वक्त सभी नशे में थे। परिवार का कहना है कि ये सभी युवा थे और बिना किसी को देखे उन्होंने अपनी बंदूकों से फायर करना शुरु कर दिया।
होटल में लड़ाई करते-करते सभी सड़क पर आ गए और गोलियां बरसाते रहे। इस वारदात में सुमन के मोहल्ले के पांच लोगों को गोली लगी और इसी में 12 साल की सुमन भी शामिल थी।
सुमन ने गंवाई एक किडनी
गोली सुमन के पेट में लगी थी और उसे बुरी तरह जख्मी कर चुकी थी। गोली ने सुमन की किडनी को बुरी तरह प्रभावित किया। सुमन 20 दिन तक अस्पताल में रही। इस दौरान उसके कई ऑपरेशन किए गए और अंततः उसके घर वालों ने उसे डिस्चार्ज करा लिया।
सुमन के परिवार का कहना है कि अब उनके पास इलाज कराने के लिए पैसा नहीं है। गोली के जहर से सुमन की एक किडनी इतनी बुरी तरह से प्रभावति हुई कि उसे निकालना पड़ा।
सुमन की दूसरी किडनी भी इससे प्रभावित हो रही है और अब परिवार ने इलाज के लिए दिल्ली के पुलिस कमीश्नर से मदद की मांग की है। सुमन की मां संगीता का कहना है कि उसे उम्मीद है कि सुमन ठीक हो जाएगी और अपने सपनों को पूरा करेगी।
किसी नेता ने नहीं की मदद
हालांकि, इस दौरान स्थानीय नेताओं ने भी सुमन के घर का दौरा किया लेकिन अभी तक किसी ने भी परिवार की कोई मदद नहीं की है। स्थानीय आप विधायक एसके बग्गा ने परिवार को भरोसा दिलाया था कि उनकी आर्थिक मदद की जाएगी।
सुमन के एक रिश्तेदार का कहना कि भाजपा काउंसलर भी सुमन को देखने आईं थी लेकिन किसी ने अभी तक इस परिवार की कोई खास मदद नहीं की है।
एक महीने पहले हुई इस घटना के बारे में पुलिस का कहना है तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि, बाकी अभी तक फरार हैं।
एक मासूम जो बिना किसी वजह के नशेड़ियों की गोलीबारी का शिकार हो जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है, क्या दिल्ली सरकार और पुलिस में से किसी को भी इसकी परवाह है?