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400 करोड़ के नाम पर 12 करोड़ ठगने वाला धराया

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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने कॉरपोरेट लोन व लोन गारंटी दिलाने नाम पर ठगी करने वाले शातिर ठग को दबोचा है। आरोपी की पहचान संजय शर्मा उर्फ संजय भारद्वाज के रूप में हुई।
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इसने अपने भाई व अन्य के साथ मिलकर कच्छ, गुजरात के कारोबारी से 400 करोड़ के नाम पर 12.07 करोड़ व असम के कारोबारी से बैंक गारंटी दिलाने का झांसा देकर 1.09 करोड़ रुपये ठग लिये थे। पुलिस की मानें तो अलग-अलग राज्यों में इसके खिलाफ ठगी के आठ मामले दर्ज हैं।

दिल्ली में 2009 के एक ठगी के मामले में साकेत कोर्ट ने इसे भगोड़ा घोषित किया हुआ था। वहीं सीबीआई ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक ऑफिसेज विंग) मुंबई के मामले में भी आरोपी भगोड़ा है। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने संजय की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था।
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जस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया ये नटवरलाल

पुलिस उपायुक्त मंगेश कश्यप ने बताया कि एक सूचना के बाद बृहस्पतिवार को एसीपी एम.एस शेखावत और एसआई उमेश शर्मा व अवधेश कुमार व अन्य की टीम ने आरोपी को उदयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी पिछले काफी समय से आरोपी पुलिस को चकमा दे रहा था। आरोपी संजय शर्मा से पूछताछ कर पुलिस छानबीन कर रही है।

आरोपी अपने पिता ओम प्रकाश भारद्वाज और भाई साकेत भारद्वाज के साथ मिलकर देशभर के कई प्रमुख शहरों के कारोबारियों को अपना शिकार बना चुका है। ओमप्रकाश की मौत हो चुकी है।

दिल्ली में कारोबारियों को ऐसे ठगा

कच्छ गुजरात के कारोबारी नरेश कुमार शर्मा ने 17 दिसंबर 2014 को आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत कर 12.07 करोड़ ठगी की
सूचना दी थी। मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की गई।

नरेश ने बताया कि उसकी कंपनी नुकसान होने की वजह से घाटे में चल रही थी। अप्रैल 2012 में एक पारिवारिक कार्यक्रम में नरेश के भाई रमेश ने उसकी मुलाकात संजय शर्मा व साकेत शर्मा से कराई।

उन्होंने बताया कि उनकी फाइनेंस करने की कंपनी है, जो 100 करोड़ से अधिक का कॉरपोरेट लोन उपलब्ध कराती है। इनका मुख्यालय थाईलैंड में है। नरेश ने 400 करोड़ लोन लेने की इच्छा जताई।

संजय ने दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में एक विदेशी नागरिक डेविड वेल्हाम, राज मल्होत्रा उर्फ अरुण शर्मा और एक वकील नीरज गुप्ता से कई मीटिंग कराईं। सभी को कंपनी का अधिकारी बताया गया। बाद में प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अपने खातों में 12.07 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
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असम के कारोबारी से ठगी

अन्य मामला वर्ष 2009 का है। शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने बताया था कि असम में उनका केबल का कारोबार है। 2008-2009 में बिजली की तीन सरकारी कंपनियों से उन्हें केबल डालने का कांट्रैक्ट मिला था।

तीनों कंपनियों में अशोक की कंपनी से 15 से 30 दिन के भीतर 33 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मांगी। इस बीच 22 फरवरी 2009 को एक नामी अंग्रेजी न्यूज पेपर में विज्ञापन देखकर अशोक ने ओमप्रकाश व उसके बेटों संजय भारद्वाज व साकेत भारद्वाज से संपर्क किया।

आरोपियों ने बैंक गारंटी दिलाने का झांसा देकर पीड़ित से 1.09 करोड़ रुपये ठग लिये थे।
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