स्नेह, सच्चाई और निस्वार्थ भाव से की गई सेवा से अपना व दूसरों का भाग्य बनता है। यह बात ब्रह्माकुमारी की मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने भोड़ाकलां स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर (ओआरसी) में आमंत्रित विशिष्ट मेहमानों के सामने सोमवार को कही। कार्यक्रम का संचालन हुसैन ने किया।
उन्होंने कहा कि राजयोग के अभ्यास से हमारा तन और मन दोनों ही स्वस्थ रहते हैं। वह आज 103 वर्ष की आयु में भी निरंतर राजयोग करती हैं लेकिन स्वाभाविक रूप से ही मन परमात्मा के साथ जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि धैर्य ही शक्तिशाली बनाता है, जितनी सहनशीलता होगी, उतना ही आंतरिक शक्ति का विकास होगा।
उन्होंने कहा कि जीवन से पांच विकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को दूर भगाओ। ओआरसी की निदेशिका आशा ने कहा कि दादी का जीवन सबके लिए एक दर्पण है। 103 वर्ष की होने के बाद भी दादी की स्मृति में अभी कोई कमी नहीं आई है।