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कुरैशी साहब के घर में चलती है वाइफ मैनेजमेंट की 'क्लास'

Fri, 13 Feb 2015 08:46 AM IST
निशांत खनी/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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कुशलता से दो परिवार एक साथ चलाना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन हल्द्वानी के कुरैशी साहब ने दोनों बीवियों के लिए आमने-सामने मकान बनाए हैं। एक साथ दो घरों में वह रह नहीं सकते, इसके लिए उन्होंने एक नुस्खा अपनाया है।
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दोनों की डोर बेल एक साथ दबाते हैं, जो दरवाजा पहले खुलता है वहीं चले जाते हैं। यह सिलसिला पिछले दो दशकों से चला आ रहा है। इसी फैमिली मैनेजमेंट के इसी फार्मूले से जियाउद्दीन कुरैशी अपने दोनों परिवार के साथ हंसी-खुशी जिंदगी बिता रहे हैं।

इंद्रानगर, मोहम्मदी चौक निवासी जियाउद्दीन कुरैशी इलाके के नामचीन शख्सियत हैं। उनकी दो शादियां हैं। पहली शादी 1988 में बिजनौर शेरकोट की अफरोज बेगम के साथ और दूसरी शादी 1990 में हल्द्वानी लाइन नंबर 16 की आरफा बेगम से हुई है।
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कुरैशी साहब की पहली शादी से तबस्सुम (20), वसीम (19), शाहवाज (16), हिना (12), सोनम (11) और नेहा (14) कुल छह संतानें हैं। दूसरी बीवी से दो बेटे जावेद (18), अजहरूद्दीन (15) हैं। दूसरी बीवी को कभी ये महसूस नहीं हुआ कि उसके दो ही बच्चे हैं, कुरैशी साहब ने बच्चों को भी बांटा है।

बीवियों में बहनों की तरह प्यार

सोनम और नेहा को पैदा होते ही दूसरी बीवी की गोद में डाल दिया। पहली बीवी की दोनों बेटियों को दूसरी बीवी ने न केवल अपना दूध पिलाया, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा भी बनाया।

दोनों बीवियों के परिवार में अब चार-चार बच्चे हैं। दोनों ही बीवियों में बहनों की तरह प्यार है। बच्चे कौन सी बीवी के हैं आसपड़ोस के लोग तक नहीं पहचान पाते हैं।

कब किस पत्नी के साथ रहा जाए कुरैशी साहब ने इसके लिए आसान फार्मूला निकाला है। दोनों ही बीवियों के लिए मोहम्मदी चौक में एक ही सड़क पर आमने-सामने मकान बनाए हैं। कुरैशी साहब जब घर लौटते हैं तब दोनों मकानों की डोर बेल बजाते हैं। जो दरवाजा पहले खुल जाता है वहां चले जाते हैं।

दोनों ही घरों में हर जरूरत का सामान और खर्चा मिलता है। सभी बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जियाउद्दीन कुरैशी कहते हैं, दोनों ही बीवियां उनकी जिंदगी के दो पहिए हैं। आपसी तालमेल से ही यह गाड़ी चल ही नहीं रही, बल्कि दौड़ रही है।
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विरासत में मिली तहजीब

जियाउद्दीन कुरैशी को पिता अब्दुल वजीर से इंसानियत विरासत में तहजीब मिली है। वो हमेशा लोगों की मदद करते हैं। पिता के नाम पर इंद्रानगर में स्कूल खोला है, जिसमें गरीब बच्चे मुफ्त में पढ़ते हैं।

दो बार रह चुके हैं सभासद
कुरैशी 1997 से 2008 तक हल्द्वानी में लगातार दो बार सभासद और तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार में दो बार हज कमेटी सदस्य रह चुके हैं। अभी ठेकेदारी में भी उनका रुतबा है।

सलड़ी के पास मंदिर बनाने में किया सहयोग
कुरैशी साहब के लिए इंसानियत ही धर्म है। उनके सहयोग से ही सलड़ी के पास मंदिर बना है। जिस जगह पर मंदिर बना है वहां से 15 फरवरी 1988 को कुरैशी साहब की जीप खाई में गिर गई थी। इस दुर्घटना में उनके मित्र अरविंद अग्रवाल समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। खुद बच गए।

रेयर ब्लड ग्रुप है
जियाउद्दीन कुरैशी का ब्लड ग्रुप एबी निगेटिव है, जो कि बेहद रेयर है। कुरैशी ने 23 बार ब्लड डोनेशन किया है, जिससे उनकी हाथ की नशों में गांठ बन चुकी हैं। जिनको खून दिया उनका नाम और धर्म नहीं जानते हैं।
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