बैठक में यह भी फैसला किया गया कि हर सरकारी कर्मचारी को संपत्ति का ब्योरा हर साल अनिवार्य रूप से दाखिल करना होगा। सीएम ने कहा कि इंटेलीजेंस तंत्र को मजबूत करने के लिए थानों से संपर्क बढ़ाया जाए और विजिलेंस सीमांत क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दें। बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, सचिव गृह नितेश झा, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, डीजी (कानून एवं व्यवस्था) अशोक कुमार, एडीजी विनय कुमार आदि शामिल थे।
यह है विजिलेंस का हाल
- राज्य गठन के बाद से 2018 तक विजिलेंस ने ट्रैप के 208 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगाई, 22 मामलों में सजा दिलवाई, 28 मामलों में आरोपी बरी हुए, दो मामलों में जांच जारी और 138 मामले अंडर ट्रायल हैं।
- इंवेस्टीगेशन के 61 मामलों में एफआर लगी, 52 मामले निपटाए गए और नौ मामले लंबित है।
- राज्य गठन के बाद से 2018 तक विजिलेंस ने 165 शिकायतें दर्ज की। इनमें से 110 मामले निपटाए और 55 मामले अभी लंबित हैं।
- विजिलेंस का अपना फेसबुक पेज भी है लेकिन उस पर ट्रैफिक न के बराबर है। पेज एक मई के बाद से अपडेट नहीं हुआ है। इसी तरह से विभाग ने व्हाट्सएप नंबर और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया हुआ है।