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अब देहरादून में नहीं मिलेंगे विक्रम!

Sat, 18 Jan 2014 08:50 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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शुक्रवार से देहरादून में विक्रमवाले जगह-जगह रुककर न तो सवारियों को बैठा पाएंगे और न ही उतार पाएंगे।
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शुक्रवार से शहर भर में अभियान
इनका संचालन अब ऑटो की तरह बुकिंग पर ही किया जा सकेगा। रास्ते से फुटकर सवारी बैठाने का अधिकार सिर्फ सिटी बस संचालकों को होगा। विक्रम संचालकों पर लगाम कसने के लिए आरटीओ विभाग शुक्रवार से शहर भर में अभियान चलाएगा।

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बुधवार को संभागीय परिवहन अधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। इस फरमान से विक्रम संचालकों में हड़कंप मच गया है। वहीं सिटी बस संचालकों में जश्न का माहौल है। इस समय शहर में विभिन्न रूटों पर 782 विक्रम संचालित हो रहे हैं।
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विक्रमों को ऑटो की तरह ठेका परमिट जारी किया गया है। इस परमिट के तहत संचालक रास्ते से फुटकर सवारी नहीं बैठा सकते। उन्हें केवल बुकिंग पर चलना होता है। लेकिन दून में विक्रम संचालकों ने अपनी ही व्यवस्था बना ली थी।

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उन्होंने खुद ही रूट बना डाले और विक्रमों को रूट नंबर भी दे दिए। रास्ते से सवारी उठाने के लिए स्टेज कैरियज का परमिट जरूरी है, जो सिर्फ सिटी बस संचालकों के पास है। सिटी बस संचालक लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे थे। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था।

होगा पांच हजार का चालान
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) संदीप सैनी ने बताया शुक्रवार से कई टीमें बना कर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया केवल सिटी बस संचालक ही फुटकर सवारी बैठा सकते हैं।

विक्रम संचालकों ने नियम का उल्लंघन किया तो पांच हजार रुपए का चालान किया जाएगा। इसके बाद भी नियम का उल्लंघन हुआ तो परमिट निरस्त कर दिया जाएगा।

अब तक क्यों चुप था विभाग
विक्रमों का संचालन नियम परमिट के विरुद्ध हो रहा है, यह बात आरटीओ विभाग को एकाएक याद आई। विक्रम संचालक सड़कों पर मनमानी करते रहे, लेकिन आरटीओ विभाग सालों तक खामोश रहा।

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परमिट भी आरटीओ ने ही जारी किया था, लेकिन नियमों के उल्लंघन पर विभाग हमेशा खामोश रहा। ऐसा क्यों हुआ, विभाग के पास इन बातों का कोई जवाब नहीं है।

शहर में सवारी का संकट तय
देहरादून में आम लोगों के पास सस्ती सवारी के दो ही विकल्प हैं, सिटी बस या विक्रम। ऐसे में विक्रमों का संचालन बंद हुआ तो लोगों के लिए सवारी का संकट खड़ा हो जाएगा।

वैकल्पिक व्यवस्था के सवाल पर आरटीओ विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। परिवहन व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञ इस फैसले को अव्यवहारिक और जनता के लिए परेशानी भरा बता रहे हैं। उधर, विक्रम यूनियनों ने भी आंदोलन की चेतावनी दी है।

शहर में इस समय 11 रूटों पर 782 विक्रम संचालित हो रहे हैं, जो अचानक सड़कों से गायब हो जाएंगे। इन विक्रमों में रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं। दर्शनलाल चौक से आईएसबीटी, धर्मपुर, रायपुर, कांवली रूट पर यात्रियों का सबसे अधिक दबाव है।

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उधर, शहर में लगभग 325 सिटी बसें हैं, जिनका रूट विक्रमों से लंबा है। विशेषज्ञों के अनुसार सिटी बस की मौजूद व्यवस्था इतना बोझ उठा पाने में सक्षम नहीं है। सबसे ज्यादा समस्या स्कूल जाने वाले बच्चों, कामकाजी लोगों और बाहर से आने वाले यात्रियों को होगी।

सवारी मिलने में दिक्कत तो होगी ही, दाम भी अधिक चुकाने पड़ेंगे। जो यात्री विक्रम में पांच से दस रुपए किराया देकर गंतव्य तक पहुंच रहा था, उसे अब आटो का रेट चुकाना होगा।

जीत हमारी ही होनी थी। आरटीओ विभाग ने निर्णय लेने में इतना देर क्यों लगाई, यह बात रहस्यमय है। जब विक्रमों के पास ठेका परमिट है तो वह कैसे स्टेज कैरियज चल सकते हैं।
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- विजय वर्धन डंडरियाल, अध्यक्ष, सिटी बस महासंघ

हमें आरटीओ विभाग के अधिकारियों ने अभियान के बारे में जानकारी दी है। हम इस अभियान का विरोध करते हैं। सिटी बस संचालकों के दबाव में यह अभियान चलाया जा रहा है।
- संजय अरोड़ा, प्रेमनगर रूट अध्यक्ष (विक्रम)
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