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Dehradun News: आत्म साक्षात्कार और मानसिक शुद्धि का साधन है योग

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एसजीआरआर विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ यौगिक साइंस एंड नेचुरोपैथी की ओर से दर्शन शास्त्र, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संबंधों पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ डीन प्रो. डॉ कंचन जोशी ने किया।
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पहले सत्र में देव संस्कृति विवि हरिद्वार के प्रो. डॉ. सुरेश लाल बर्णवाल ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम या आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्म-साक्षात्कार, मानसिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का साधन है। योग ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाने में सहायक है। डीन प्रो. डॉ कंचन जोशी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन के क्षेत्र में संतुलन और समृद्धि प्राप्त करने का मार्गदर्शक है। योग और दर्शन का गहरा संबंध है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है।

डॉ. कामाख्या कुमार ने कहा कि जीवन में संतुलन बनाए रखना, कठिनाइयों को स्वीकार करना और हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण रखना भी योग का ही एक रूप है। डॉ. रुद्र भंडारी ने कहा कि नियमित योगाभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र प्रसाद रयाल, रश्मि पांथरी, विशाल, प्रो. डॉ. संजय शर्मा, डॉ. द्वारिका प्रसाद मैठाणी, प्रो. डॉ. अशोक नायक, प्रो. डॉ. सरस्वती काला, डॉ. अनिल थपलियाल, डॉ. बिजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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